दिनदहाड़े हुई थी तीन लोगों की मौत
यह मामला नौ जून को उस समय सुर्खियों में आया था, जब गैंगस्टर वरुण लुहारी अपने साथियों के साथ टेंट कारोबारी सोहनलाल अग्रवाल की दुकान पर पहुंचा था। वहां हुई ताबड़तोड़ गोलीबारी में सोहनलाल अग्रवाल और उनके पुत्र विकास अग्रवाल की मौत हो गई थी। पुलिस के अनुसार घटना के बाद भाग रहे वरुण लुहारी को दीपक अग्रवाल ने गोली मार दी थी, जिससे उसकी भी मौत हो गई। पूरी वारदात निकट लगे निगरानी चित्रों में भी कैद हुई थी।
दो पक्षों में बंटा था शहर, सामाजिक माध्यमों पर भी छिड़ी थी बहस
घटना के बाद शहर में लंबे समय तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा। व्यापारी संगठनों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने पिता-पुत्र की हत्या के आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन किए। वहीं दूसरी ओर वरुण लुहारी के परिजनों और समर्थकों ने दीपक अग्रवाल की गिरफ्तारी की मांग को लेकर आंदोलन चलाया। इस दौरान मास्टर बाबूराम के समर्थन में संघर्ष समिति का गठन भी किया गया और अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे गए।
दूसरी ओर व्यापारी वर्ग दीपक अग्रवाल के पक्ष में खड़ा रहा और उसका कहना था कि उसने आत्मरक्षा में यह कदम उठाया। इस पूरे मामले को लेकर सामाजिक माध्यमों पर भी दोनों पक्षों के समर्थन में लगातार टिप्पणियां और संदेश प्रसारित होते रहे। कुछ आपत्तिजनक सामग्री सामने आने के बाद पुलिस को विशेष निगरानी रखनी पड़ी।
पुलिस बोली- साक्ष्यों के आधार पर हुई कार्रवाई
क्षेत्राधिकारी अंशु जैन ने स्पष्ट किया कि दीपक अग्रवाल की गिरफ्तारी किसी दबाव का परिणाम नहीं है। उन्होंने कहा कि विवेचना में जो साक्ष्य सामने आए, उनके आधार पर वैधानिक कार्रवाई की गई है। जांच अभी जारी है और आगे जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।