तहसीलों में अफसरों ने अंश निर्धारण में गड़बड़ी कर दी। यह गड़बड़ी केवल कागजों तक नहीं हुई, बल्कि इनसे परिवारों में रिश्ते भी बिगड़ गए। परिवार में अंश निर्धारण के दौरान किसी भाई के नाम ज्यादा जमीन चढ़ी है और दूसरा भाई उसे ठीक कराने के लिए कहता तो विवाद शुरू हो गए।
इस तरह किसी एक परिवार में नहीं हुआ है, बल्कि जिले में दस हजार से ज्यादा किसानों को इस समस्या से जूझना पड़ रहा है। इसमें भी सबसे बुरा हाल बड़ौत तहसील का है। अंश निर्धारण में किसी के नाम ज्यादा जमीन चढ़ा दी गई है तो किसी के नाम कम दर्ज कर दी गई। किसान उसको ठीक कराने के लिए तहसील के चक्कर काट रहे हैं और उनको ठीक नहीं किया जा रहा है। तहसील अधिकारियों की लापरवाही के कारण करोड़ों रुपये की अपनी ही जमीन को कागजों में दर्ज कराने के लिए किसानों को जूझना पड़ रहा है।
11 बीघा जमीन केवल पौने चार बीघा रह गई
बड़ौत की पट्टी मेहर के रहने वाले संजय शर्मा और उनके भाई गिरिराज ने वर्ष 2000 में सौरभ के दादा बलवीर से जमीन खरीदी थी। दोनों भाइयों के नाम 11-11 बीघा जमीन दर्ज हो गई। उस खाता संख्या की बाकी जमीन पर बेचने वाले परिवार के नाम दर्ज थे। कोरोना काल में गिरिराज की मौत के बाद उनके हिस्से की जमीन पत्नी रेखा और बेटों अर्जुन व शिवम के नाम दर्ज हुई। पिछले साल फर्द में अंश निर्धारण हुआ तो संजय शर्मा, सौरभ, जसवीर, बबीता, सत्यवीर समेत दस खातेदारों के नाम पूरी जमीन को 1/10 हिस्से में दर्ज कर दिया गया। 11 बीघा जमीन घटकर करीब पौने चार बीघा रह गई। अब वह तहसील के चक्कर काट रहे हैं। अन्य खातेदारों से अपने पक्ष में लिखकर देने के लिए कहते हैं तो विवाद हो गया।
बराबर हिस्सा दर्ज, किसी को ज्यादा तो किसी को जमीन कम
किरठल गांव के ज्ञान सिंह, दिवस, बबलू और विकास की 6.35 बीघा जमीन थी। अंश निर्धारण में चारों का हिस्सा बराबर मानकर प्रत्येक के नाम करीब 1.59 बीघा दर्ज कर दी गई। वास्तविक हिस्से के अनुसार ज्ञान सिंह के नाम 1.59, दिवस के नाम 2.38 और बबलू व विकास के नाम करीब 1.19-1.19 बीघा जमीन दर्ज होनी थी।
ऑनलाइन आवेदन से होगा सुधार
इस तरह की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। समाधान के लिए पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन लेकर सही अंश निर्धारण की प्रक्रिया की जा रही है। संबंधित लेखपालों को मामलों का निस्तारण करने के निर्देश दिए गए हैं।
-बाल कृष्ण सिंह, एसडीएम बड़ौत