ग्रामीणों ने बताया कि सिनौली से बावली गांव तक पानी निकासी के लिए पहले कच्चा नाला था, जो काफी पुराना होने की वजह से क्षतिग्रस्त हो गया था। बताया कि कई बार डीएम व अन्य अधिकारियों से मिलकर शिकायत करने के बाद 400 मीटर पक्का नाला निर्माण कराना प्रस्तावित कराया। जिसके बाद 400 मीटर नाला निर्माण के लिए लगभग 18 लाख रूपयों की धनराशि स्वीकृत हो गई थी।
ग्रामीणों ने बताया कि लगभग 25 दिन पहले ही 400 मीटर में से 350 मीटर नाला का निर्माण कार्य शुरू कराया गया था, लेकिन ठेकेदार द्वारा घटिया सामग्री का इस्तेमाल किएं जाने के कारण नाला टूट गया था। जिसकी शिकायत अधिकारियों से की गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
आरोप लगा कि अधिकारियों ने ठेकेदार से मिलीभगत कर फिर से नाले का निर्माण कार्य शुरू करा दिया, लेकिन एक बार भी ग्रामीणों के आरोप की जांच नहीं कराई। ग्रामीण चेतावनी दी कि जब तक जांच कर घटिया सामग्री लगाने पर ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो जाती, तब तक नाले का काम शुरू नहीं होने दिया जाएगा। इस संबंध में अवर अभियंता रोहित कुमार का कहना है कि ठेकेदार को नोटिस देखकर दोबारा से सही ढंग से नाले के निर्माण कराने के लिए कहा गया था, लेकिन ग्रामीणों ने काम नहीं होने दिया।
एसडीएम सुभाष सिंह ने बताया कि नाले में घटिया सामग्री के इस्तेमाल करने की शिकायत ग्रामीणों ने की है। इस संबंध में डीएम से बातचीत कर ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी और विभागीय कर्मचारियों से भी जवाब तलब किया जाएगा।