मुफ्ती सोमवार को सामान समेटकर गांव से चले गए।
- फोटो : अमर उजाला
मुफ्ती इब्राहिम ने पत्नी और दो बेटियों की हत्या के बाद मंगलवार को गांगनौली गांव की मस्जिद को छोड़ दिया। वह रविवार को कमरे से कुछ सामान व रुपये लेकर गए थे, मगर सोमवार को अपना सभी सामान कैंटर में भरकर वहां से चले गए। ग्रामीणों ने मुफ्ती इब्राहिम को रोकने का प्रयास किया लेकिन वे नहीं रुके। वह अपने पैतृक गांव सुन्ना जिला शामली गए। इसलिए सोमवार को नमाज के बाद मस्जिद का गेट बंद कर ताला लगा दिया गया।
शामली जिले के सुन्ना गांव से सोमवार को रिश्तेदारों के साथ गांगनौली गांव की मस्जिद में आए मुफ्ती इब्राहिम ने कमरे में रखा सामान बांधना शुरू कर दिया। इसका पता चलते ही वहां पर ग्रामीणों की भीड़ लग गई। ग्रामीणों ने मुफ्ती को सामान बांधने से रोका और यहीं पर रहने के लिए कहा।
मुफ्ती इब्राहिम ने कहा कि यहां पर पत्नी और दोनों मासूम बेटियों की हत्या होने से मेरी पूरी दुनिया ही उजड़ गई। अब मेरा कहीं पर भी मन नहीं लग रहा। समझ नहीं आ रहा है कि अब कहां जाऊं और क्या करूं। अब मैं अपना सामान लेकर वापस सुन्ना गांव जा रहा हूं। यही बात कहकर मुफ्ती इब्राहिम रिश्तेदारों के साथ गाड़ी में बैठकर गांगनौली से चले गए।
कमेटी करेगी देखरेख, नमाज के बाद लगेगा ताला
मुफ्ती के गांगनौली गांव से जाने के बाद मस्जिद की देखरेख की जिम्मेदारी कमेटी को दी गई। कमेटी के पदाधिकारी वकील, शहीदू, महरदीन, शाकिर, अलीहसन, फैय्याज, कय्यूम आदि ने बताया कि मुफ्ती ने मस्जिद की जिम्मेदारी कमेटी को वापस दे दी है और अपना सामान लेकर चले गए हैं। नए मुफ्ती के आने तक मस्जिद की देखरेख की जिम्मेदारी कमेटी की रहेगी। नमाज के दौरान ताला खोलकर साफ-सफाई के लिए समाज के एक व्यक्ति को जिम्मेदारी दी जाएगी।