इस तरह करते हैं हर महीने राशन चोरी
कार्ड धारकों को राशन वितरण हर महीने 8 से 15 तारीख के बीच किया जाता है। इससे पहले गोदाम से राशन को गांवों में डीलरों के पास दुकानों पर पहुंचाना होता है, तभी राशन चोरी की जाती है। ट्रक में गोदाम से जौहड़ी, आरिफपुर खेड़ी, अंगदपुर के डीलरों की दुकान तक राशन पहुंचाया जाता है, क्योंकि यह तीनों गांव सटे हुए हैं।
इन तीनों डीलरों के यहां डेढ़ सौ क्विंटल गेहूं और 246 क्विंटल चावल जाता है। गोदाम से एक ट्रक में गेहूं और दूसरे में चावल भरा जाता है। गांव के बाहर धर्मकांटे पर तीनों डीलरों को बुलाया जाता है और उनके सामने तौल कराई जाती है।
राशन का वजन पूरा होता है और ट्रकों को राशन उतारने के लिए डीलरों के यहां भेज दिया जाता है। वहां ट्रक में डेढ़ से दो क्विंटल तक गेहूं कम निकलता है और चावल भी इतना ही कम निकलता है। उस पर कोई ज्यादा आपत्ति न करे, इसलिए दो तीन बोरे फाड़ दिए जाते हैं। इससे गेहूं व चावल ट्रक में बिखर जाता है और उसकी बाद में तौल न होने से राशन बिखरा हुआ बताकर चोरी पकड़ में नहीं आती है।
कार्ड धारकों पर डाला जाता है बोझ
डीलरों के यहां दुकानों पर राशन कम पहुंचता है तो इसका नुकसान डीलर खुद नहीं झेलते हैं। वहीं इसका बोझ कार्ड धारकों पर भी डाला जाता है। राशन वितरण का नियम यह है कि एक सदस्य की एक यूनिट मानी जाती है। एक यूनिट पर एक महीने में दो किलो गेहूं व तीन किलो चावल दिया जाता है। किसी कार्ड में परिवार के पांच सदस्यों का नाम दर्ज है तो किसी भी एक सदस्य का अंगूठा लगवाकर राशन दिया जा सकता है। इसमें ही घालमेल किया जाता है और कम यूनिट पर राशन दिया जाता है।
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