नगर पालिका चेयरमैन के पद से हटाए जाने के बाद राजुद्दीन एडवोकेट ने आदेश पर स्टे के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। सरकार से कोई राहत नहीं मिलने के बाद वह हाईकोर्ट में पहुंचे। वहीं नगर पालिका के प्रशासक व एडीएम शिवनारायण ने गड़बड़ी संबंधी सभी फाइलों को लेकर हाईकोर्ट में जवाब दाखिल कर दिया है।
बागपत गन्ना समिति के चेयरमैन प्रदीप ठाकुर की शिकायत पर नगर पालिका के चेयरमैन पद से राजुद्दीन को शासन ने 15 दिन पहले हटाया था। उन पर पद का दुरुपयोग करते हुए नगर पालिका की खाली हुई दुकानों का आवंटन नियम विरुद्ध करने का आरोप है। इसके अलावा दस, बीस, पचास, सौ रुपये के स्टांप के आधार पर 739 प्लॉटों को संपत्ति कर के रिकॉर्ड में दर्ज कराने का आरोप है। इसमें उनको दोषी मानते हुए कार्रवाई की गई।
राजुद्दीन ने पहले सरकार के पास जाने की बात कही थी, मगर उनको सरकार से कोई राहत मिलती नहीं दिखी। इस कारण ही वह हाईकोर्ट में पहुंच गए। वहां उन्होंने आदेश के खिलाफ याचिका दायर की। वहीं, शासन ने पहले ही कैविएट दायर कर दी थी, जिससे हाईकोर्ट से कोई आदेश होने से पहले उनकी बात सुनी जा सके।
इसलिए ही हाईकोर्ट में राजुद्दीन की याचिका दायर होने पर प्रशासन ने अपना जवाब दाखिल किया। एडीएम शिवनारायण के अनुसार प्रशासन की तरफ से जवाब दाखिल कर दिया गया है। इसमें सुनवाई के बाद ही कोई फैसला हो सकेगा।
अन्य फाइलों में जांच तेज हुई
शहर के पक्का घाट पर श्मशान घाट के निर्माण में घोटाले के आरोप और केतीपुरा में भू-माफियाओं को फायदा पहुंचाने के लिए कब्रिस्तान की जमीन में इंटरलॉकिंग लगवाने के आरोप की फाइलों में जांच काफी आगे तक हो चुकी है। इनमें अभी तक की जांच में घपला मिल चुका है। इनके अलावा नगर पालिका के बाहरी क्षेत्र में कार्य कराकर रुपये खर्च करने और सब्जी मंडी में अवैध रूप से दुकानों का निर्माण कराकर आवंटन करने के आरोपों की जांच भी तेज कर दी गई।
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