बड़ौत में पूर्व सांसद डॉ. सत्यपाल सिंह ने कहा कि बागपत की धरती वीरता और विद्या का अद्भुत संगम है। उन्होंने बाबा शाहमल के बलिदान और श्रीकृष्ण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्कारहीनता आज सबसे बड़ी समस्या है और रोजाना यज्ञ से ही मानवता और प्रकृति की रक्षा संभव है।
बड़ौत में पूर्व सांसद डॉ. सत्यपाल सिंह ने शुक्रवार को बड़ौत में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि बागपत की धरती वीरता और विद्या का अद्भुत संगम है। उन्होंने कहा कि इसी धरती पर 1857 की क्रांति के महानायक बाबा शाहमल ने 6000 किसानों के साथ अंग्रेजों को हराकर बड़ौत तहसील को आजाद कराया था। भगवान श्रीकृष्ण भी संधि प्रस्ताव लेकर हस्तिनापुर जाते समय यहीं पर रुके थे।
डॉ. सिंह ने कहा कि आर्य समाज का कार्य मनुष्य को देव पुरुष बनाना है। धर्म की असली शक्ति यज्ञ में है और रोजाना यज्ञ करने से धरती पर स्वर्ग का अनुभव किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज सबसे बड़ी समस्या संस्कारहीनता है।
पूर्व सांसद ने विचारों के प्रदूषण को सबसे खतरनाक बताया। उन्होंने कहा कि जैसे हम पूर्वजों का घर गंदा नहीं कर सकते, वैसे ही जल, वायु और भूमि को प्रदूषित करने का भी हमें अधिकार नहीं है। उन्होंने भोपाल गैस त्रासदी का उदाहरण देते हुए कहा कि उस हादसे में एक परिवार प्रतिदिन यज्ञ करता था, इसलिए वह बच गया।
कार्यक्रम में उन्होंने आह्वान किया कि ऋषियों के बताए मार्ग पर चलकर रोजाना यज्ञ करें और मानवता को सर्वोपरि रखें।