दिल्ली से मेरठ तक चला उपचार, नहीं बची जान
परिजनों का आरोप है कि दिल्ली पहुंचने पर गंभीर हालत के बावजूद किसान को अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया। इसके बाद परिवार उन्हें मेरठ के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचा, जहां उपचार शुरू किया गया। हालांकि चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद सोहरण सिंह की मौत हो गई। किसान की मौत की खबर मिलते ही परिवार और गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
सोहरण सिंह अपने पीछे पत्नी गीता, बेटा प्रशांत और तीन बेटियों का परिवार छोड़ गए हैं। ग्रामीणों और परिचितों ने उन्हें मिलनसार और मेहनती किसान बताया। भारतीय किसान यूनियन के नेता संजीव दांगी ने सरकार से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि किसान परिवार पर बड़ा संकट आ गया है और प्रशासन को मदद के लिए आगे आना चाहिए। उल्लेखनीय है कि करीब दस वर्ष पहले सोहरण सिंह के बड़े भाई एवं पूर्व प्रधान रोहताश का भी निधन हो गया था।
विशेषज्ञों ने किसानों को दी सावधानी बरतने की सलाह
डिप्टी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विभाष राजपूत ने बताया कि खेतों में खाद डालते समय कई बार पसीना आने, पानी पीने या भोजन करने के दौरान रासायनिक तत्व शरीर के भीतर पहुंच सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि खाद या अन्य रासायनिक पदार्थों का प्रयोग करते समय मुंह पर कपड़ा बांधें या मास्क का उपयोग करें। विशेष रूप से गर्मी और उमस के मौसम में यह सावधानी बेहद आवश्यक है।