श्रुति राणा परिजनों के साथ
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श्रुति राणा ने राष्ट्रीय ध्रवीय एवं समुद्री अनुसंधान केन्द्र के अंतर्गत 10 अक्टूबर से 18 अक्टूबर तक गोवा में साक्षात्कार दिया था। जिसमें उन्होंने इंटरव्यू पास कर लिया है और उन्हें वैज्ञानिक पद के लिए चयनित कर लिया गया है। अब श्रुति आर्थिक खनिजकरण भुविज्ञान के तहत गहरे-गहरे महासागर में खनिज संसाधनों का सर्वेक्षण और अन्वेषण पर काम करेगी। उनकी इस उपलब्धि पर पूरे गांव व बड़ौत शहर में खुशी की लहर दौड़ गई।
दादा से मिली प्रेरणा, तो श्रुति ने छू लिया आसमां
बड़ौत। श्रुति बचपन से ही पढ़ाई मेें होनहार रही है। श्रुति के लिए उनके दादा स्वर्गीय नहार सिंह व उनकी दादी शंकुतला देवी के भाई वेदपाल मलिक जो यूएसए कृषि विभाग में वैज्ञानिक है और उनके परिवार से उनके भाई आईपीएस सुधांश धामा प्रेरणा के स्त्रोत्र रहे है।
श्रुति ने किस्तु ज्योति कान्वेट स्कूल से हाईस्कूल, ग्रौवेल गर्ल्स स्कूल से इंटरमीडिएट पास करने के बाद दिल्ली से जियालॉजी विषय से बीएससी, नैनाताली के कुमाऊॅ विश्वविद्यालय से एमएससी व उसके बाद कुमाऊ विश्वविद्यालय एवं वाडिया हिमालयन भूविज्ञान संस्थान देहारदून से भूगर्भ शास्त्र पर पीएचडी की पढ़ाई की। उनके भाई विश्वजीत राणा बीटेक के बाद यूपीएससी की तैयारी कर रहे है, जबकि एक भाई मानिक राणा एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे है।
श्रुति राणा का हौसलाअफजाई करती रही मां
जब भी कभी श्रुति राणा किसी बात को लेकर मायूसी होती, तभी उनकी माता रीता राणा, जो सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी पंचायत कार्यालय बागपत मेें तैनात है, उनका हौसलाअफजाई करती। बेटी की सफलता पर पूरा परिवार खुशी है।
खुद को कमजोर न समझे बेटियां, अभिभावकों से अपील बेटा व बेटी में ना करे कोई भेदभाव
श्रुति राणा से जब उनकी कामयाबी पर फोन पर बातचीत की गई ताे उन्होेंने बेटियां के लिए एक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बेटियां खुद को बिल्कुल भी कमजोर न समझे। हर क्षेत्र में आज बेटियां लड़कों की बराबरी कर रही है। कोई भी परेशानी आएं, अभिभावकों से तुंरत बात करें। अभिभावक हमेशा अपने बच्चों के हितेषी होती है। उन्हाेंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे बेटा व बेटी में अंतर न समझें। बेटियां का हौसला बढ़ाएं और उन्हें आगे बढ़ने में मदद करें।