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यूपी: मजदूरी करता है डिस्कस थ्रोअर आदित्य, खेती कर रहे निशानेबाज प्रवीण; पदक जीतने वाले हालातों से हारे

Sat, 29 Aug 2026 03:44 PM IST
Mohd Mustakim मुकेश पंवार, बागपत

सार

Baghpat News: ढिकाना निवासी पैरा निशानेबाज प्रवीण तोमर अब खेती कर रहे हैं। बिजरौल निवासी कबड्डी खिलाड़ी गौरव को खेल के बाद रोजगार नहीं मिला और अब खेती करते हैं। इसी तरह कई अन्य खिलाड़ी भी सामान्य काम करने को मजबूर हैं। 
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डिस्कस थ्रो खिलाड़ी आदित्य (कट्टा हाथ में) कर रहा मजदूरी, खेती कर रहे गौरव और प्रवीण (इनसेट)। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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किसी ने अखाड़े में प्रतिद्वंद्वी पहलवान को चित किया तो किसी ने सटीक निशाना लगाकर और कबड्डी के मैदान में विरोधियों को पछाड़कर पदक जीता। अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय मंच पर बागपत का मान बढ़ाने वाले इन खिलाड़ियों की जिंदगी में जीत के बाद भी संघर्ष खत्म नहीं हुआ। किसी को संसाधनों ने रोका, किसी पर परिवार की जिम्मेदारी भारी पड़ी तो किसी को समय पर रोजगार नहीं मिला। आज कोई खेत में पसीना बहा रहा है, कोई मजदूरी कर रहा है तो कोई एंबुलेंस चलाकर परिवार का गुजारा कर रहा है।
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अंतरराष्ट्रीय स्तर तक खेले, आज खेती ही सहारा
ढिकाना निवासी पैरा निशानेबाज प्रवीण तोमर ने 10 मीटर एयर पिस्टल में राष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीते तो अंतरराष्ट्रीय स्तर तक निशाना लगाने गए। 2006 में इंदौर में नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में रजत, 2008 में पुणे में रजत और केरल में नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण जीता। 2009 में जालंधर में नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण और आईडब्ल्यूएएस वर्ल्ड गेम्स में चौथा स्थान प्राप्त किया। 2010 में चीन में पैरा एशियन गेम्स के लिए भी चयन हुआ। हालात ऐसे पैदा हुए कि प्रवीण के पास न कोई रोजगार था और परिवार की जिम्मेदारी भी आ गई। कई साल तक खेती के साथ शूटिंग करते रहे, मगर दोनों प्रभावित होने लगे। ऐसे में खेती करनी पड़ी और वह सबकुछ छोड़कर अब खेती कर रहे हैं।
 

कबड्डी में स्वर्ण, अब खेती कर रहे गौरव
बिजरौल निवासी गौरव ने कबड्डी टीम में 2021 में उत्तराखंड और 2022 में पंजाब में राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में खेलते हुए स्वर्ण पदक जीते। 2023 में लखनऊ में प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण, अक्तूबर 2025 में जौनपुर में रजत और 2024 में इंटर यूनिवर्सिटी प्रतियोगिता में कांस्य पदक हासिल किया। दर्जनों पदक जीतने के बावजूद आज रोजगार नहीं है और खेती कर परिवार चला रहे हैं। गौरव कहते हैं कि उपलब्धियों के बावजूद समय पर रोजगार नहीं मिला, इसलिए अब खेती ही सहारा है।

राष्ट्रीय स्वर्ण पदक विजेता, अब एंबुलेंस चालक बदरखा निवासी पहलवान प्रमेंद्र ने वर्ष 2000 में हरिद्वार और 2001 में नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में 55 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। 2002 में गौतमबुद्धनगर और 2004 में हल्द्वानी में 52 किलोग्राम में स्वर्ण और 2005 में हिसार में नेशनल प्रतियोगिता में 55 किलोग्राम में रजत पदक हासिल किया। आज वह एंबुलेंस चालक हैं। परिवार के पास खेती नहीं है। पत्नी कविता और चार बच्चों मानवी, प्रिंस, प्रतीक व प्रीत की जिम्मेदारी उन्हीं पर है। प्रमेंद्र कहते हैं कि खेल के बाद नौकरी नहीं मिली, इसलिए परिवार पालने के लिए एंबुलेंस चलानी पड़ रही है।
 

डिस्कस थ्रो में कई स्वर्ण, अब मजदूरी कर रहे
बड़ौत निवासी आदित्य तंवर ने डिस्कस थ्रो में कई स्वर्ण पदक जीते। 2021 के उत्तर प्रदेश राज्य यूथ गेम्स के अंडर-23 वर्ग, नागपुर के आरटीएमएन विश्वविद्यालय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और ग्वालियर की पांचवीं एसडीपीएफ राष्ट्रीय चैंपियनशिप के ओपन वर्ग में स्वर्ण हासिल किया। बागपत खेल महोत्सव-2022 में भी प्रथम स्थान पाया। रोजगार नहीं मिलने से आज मजदूरी कर रहे हैं। आदित्य कहते हैं कि पदक जीतने के बाद नौकरी की उम्मीद थी, लेकिन रोजगार नहीं मिला और अब मजदूरी का ही सहारा है।
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ये बोले अधिकारी
खेल विभाग में खिलाड़ियों को सीधे नौकरी या आर्थिक सहायता देने का प्रावधान नहीं है। सेना, रेलवे, पुलिस समेत अन्य विभागों में समय-समय पर खेल कोटे से भर्ती होती है। आर्थिक सहायता के लिए खिलाड़ियों को खेल सारथी पोर्टल पर पंजीकरण कर प्रमाण पत्र भी देने होते हैं। जांच के बाद पात्र खिलाड़ियों को निदेशालय से सम्मान मिलता है।
-अमित कुमार, जिला खेल अधिकारी

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