जिन परिवारों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, उनके बेटे-बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति मिल जाए तो उनके लिए उससे बड़ी खुशी की बात कोई नहीं है। मगर, यहां काॅलेजों की लापरवाही से 90 विद्यार्थी छात्रवृत्ति की सूची से बाहर हो गए। काॅलेजों से उन सभी को सौ प्रतिशत अंक देकर टॉपर बना दिया गया।
उनकी जांच कराने पर अंक गलत मिलने पर आवेदन निरस्त कर दिए गए। यहां कई काॅलेजों के बीए, बीएससी, एमए, एमएससी के विद्यार्थियों ने दशमोत्तर छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया। इसमें पांच हजार रुपये तक की छात्रवृत्ति विद्यार्थियों को पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, समाज कल्याण विभाग व अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की तरफ से जांच के बाद दी जाती है।
विद्यार्थियों के आवेदन करने के बाद पूरा डाटा लखनऊ जाता है और वहां से जिनके अंक, आवेदन संख्या, आय प्रमाण पत्र समेत अन्य किसी कागज में गड़बड़ी की आशंका होती है तो उसकी जिला स्तर से जांच कराई जाती है। इस तरह शासन से जैन काॅलेज, जैन स्थानकवासी गर्ल्स डिग्री काॅलेज, जनता वैदिक काॅलेज के करीब 130 विद्यार्थियों के आवेदन संदेहस्पद मिले। उनकी जांच शुरू कराई गई।
पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने पत्र जारी करके जब काॅलेजों से विद्यार्थियों के आवेदन पत्र व अन्य कागज मांगे तो जैन स्थानकवासी डिग्री काॅलेज व जनता वैदिक काॅलेज से वह उपलब्ध करा दिए गए। संवाद