हिसावदा निवासी नौसेना फाइटर प्लेन उड़ाने वाली आस्था पूनिया। स्रोत:स्वयं
रमाला/अमीनगर सराय। बागपत की बेटियां किसी से कम नहीं हैं जो हर क्षेत्र में इतिहास रच रही हैं। यहां के कंडेरा गांव की बेटी आरती फाइटर प्लेन उड़ाकर हवा से बात कर रही हैं तो हिसावदा गांव की बेटी आस्था भी नौसेना में जहाज उड़ा रही हैं। मुजफ्फरपुर पोईस की बेटी सृष्टि ने प्लेन उड़ाकर पहली कॉमर्शियल महिला पायलट की उपलब्धि भी हासिल की।
देश की नौवीं महिला फाइटर पायलट है कंडेरा की आरती
कंडेरा गांव के किसान परिवार की बेटी आरती तोमर ने देश की नौवीं महिला फाइटर पायलट बनकर एक मिशाल कायम की है। आरती तोमर ने देश की नौवीं फाइटर पायलट बनकर दिखाया है कि लड़कियां भी बार्डर पर देश की सेवा करने में पीछे नहीं हैं। आरती बागपत जिले की पहली महिला फाइटर पायलट हैं। आरती के दादा महावीर सिंह किसान हैं और पिता प्रमोद सीआईएसएफ के हवलदार के पद से सेवानिवृत्त होकर गाजियाबाद के मोदीनगर में अपना व्यवसाय कर रहे हैं। आरती का चयन कई साल पहले एयरफोर्स में फ्लाइंग ऑफिसर के पद पर हुआ था। उन्होंने हैदराबाद के डूंडीगल स्थित एयरफोर्स एकेडमी में ट्रेनिंग ली और वह फाइटर पायलट चयनित हो गईं। आरती की सफलता पर बागपत के लोगों को गर्व है। आरती का कहना है कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान उन्होंने एयरफोर्स में जाने का सपना देखा और लक्ष्य तय करके कड़ी मेहनत के साथ उसे पूरा किया। आरती तोमर ने 26 जनवरी 2024 में गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में लालकिले पर फाइटर प्लेन उड़ाया था। आरती का कहना है कि सभी लड़कियों को अपना लक्ष्य तय करके आगे बढ़ना चाहिए तो कामयाबी जरूर मिलती है।
हिसावदा की आस्था नौसेना में जिले की इकलौती पायलट
यहां की कोई एक बेटी नहीं है जो जहाज उड़ा रही हैं। बल्कि हिसावदा की बेटी आस्था भी नौसेना में पायलट हैं। हिसावदा के रहने वाले अरुण पूनिया सरधना के नवोदय विद्यालय में अध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। उनकी बेटी आस्था पूनिया के नाम ही नौसेना में पायलट बनने की उपलब्धि है। आस्था का सपना कुछ अलग करके देश सेवा करना था। इसलिए ही मेरठ व राजस्थान से अपनी शिक्षा ग्रहण करने के बाद नौसेना में जाने का प्रयास किया। अपने प्रथम प्रयास में ही आस्था को सफलता मिल गई और वह बागपत जनपद की भारतीय नौसेना में पहली महिला पायलट बनी हैं। आस्था के पिता के साथ ही माता भी शिक्षिका हैं तो परिवार के अन्य सदस्य भी शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। इसलिए यह उम्मीद थी कि आस्था भी शिक्षा के क्षेत्र में जाएंगी। मगर, आस्था ने कुछ अलग ही राह चुनी। आस्था बताती हैं कि कठिन परिश्रम से सब कुछ हासिल किया जा सकता है और लड़कियों को खुद को कम नहीं आंकना चाहिए। वह हिम्मत दिखाएं तो सबकुछ हासिल कर सकती हैं।
मुजफ्फरपुर पोईस की सृष्टि बन गई पहली कॉमर्शियल पायलट
मुजफ्फरपुर पोईस की सृष्टि वर्मा के नाम भी बड़ी उपलब्धि है जो पहली कॉमर्शियल पायलट बनी हैं। गांव के पूर्व सरपंच स्व. शिवकुमार के बेटे कौशल वर्मा एक निजी बीमा कंपनी में अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। वह कुछ साल पहले नौकरी के कारण दिल्ली चले गए और अब मुंबई में रहते हैं। उनकी बेटी सृष्टि वर्मा कॉमर्शियल पायलट बनने की पूरी कहानी बताती हैं कि वह अपने पिता को नौकरी के कारण ज्यादातर हवाई जहाज में सफर करते हुए देखती थीं। इसलिए उन्होंने पायलट बनने की तरफ कदम बढ़ाया। सृष्टि ने कॉमर्शियल पायलट लाइसेंस कोर्स करने के लिए तीन साल पहले प्रवेश परीक्षा दी। इसमें पहले लिखित परीक्षा हुई और उसके बाद शारीरिक परीक्षा कराई गई। इसमें सृष्टि ने 27वां स्थान प्राप्त किया और उसको सरकार की इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान एकेडमी रायबरेली में जगह मिल गई। जहां दो साल की शिक्षा के बाद वह कॉमर्शियल पायलट बनीं। सृष्टि के पायलट बनते ही कई कंपिनयों से नौकरी के प्रस्ताव मिले। मगर, सृष्टि ने पहले विशेषज्ञ की ट्रेनिंग प्राप्त की।