कुर्डी टीले पर खोदाई करते मजदूर। स्रोत ग्रामीण
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बड़ौत। कुर्डी टीले पर पुरातत्वविदों ने पुरावशेषों के साथ जल स्रोत की तलाश शुरू कर दी है। यहां पर अगर जल स्रोत मिल जाता है तो भारतीय विरासत संस्थान की टीम को बड़ी उपलब्धि हासिल होगी। उनका मानना है कि वहां मानव बस्ती के प्रमाण पुष्ट होने की तरफ यह बड़ा कदम होगा।
कुर्डी टीले पर 12 ट्रेंच लगाकर खोदाई का कार्य किया जा रहा है। यहां पर अभी तक बड़ी ईंटों की दीवारें, खंडित मृदभांड ही पुरातत्विदों को मिले हैं। इनके आधार पर अभी तक मानव बस्ती की पुष्टि होने की उम्मीद जताई जा रही है। मगर, पुरातत्विदों का ध्यान अब मानव बस्ती की पुष्टि के लिए टीले पर जल स्रोत तलाशने शुरू कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार पुरातत्वविद व शोधार्थी टीले के आसपास दो किमी के दायरे में जल स्रोत तलाश कर रहे है, लेकिन अभी तक यमुना की ही एक मात्र जल स्रोत के रूप में पुष्टि हो पाई हैं। जब बस्ती थी तो यहां पर जल स्रोत का होना भी जरूरी है। क्योंकि विशाल टीला सैकड़ों बीघा जमीन पर फैला हुआ है।
n जल स्रोत मिलने पर बड़ी कामयाबी हासिल होगी : इतिहास की दृष्टि से यदि टीले पर पुरातत्वविदों को जल्द ही जल स्रोत मिल जाते हैं तो यह एक बड़ी कामयाबी हासिल होगी।
उम्मीद जताई जा रही है कि जल स्रोत मिलने के बाद ही टीले पर नए ट्रेंचों को बनाकर खोदाई शुरू की जाएगी। इनसे महत्वपूर्ण पुरावशेष मिल सकते हैं, जिनकी पुरातत्विदों को तलाश है।