लाक्षागृह टीले पर उत्खनन करती पुरातत्व विभाग की टीम।
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भारतीय पुरातत्व संस्थान और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा बरनावा लाक्षा गृह पर कराए जा रहे उत्खनन के दौरान पुरावशेष निकलने शुरू हो गए हैं। छह दीवार मिलने के बाद वहां कुछ मृदभांड भी निकले हैं, इनको देखकर लोग अंदाजा लगा रहे हैं कि यहां प्राचीन भवन हो सकता है।
भारतीय पुरातत्व संस्थान लाल किला नई दिल्ली के डायरेक्टर डॉ. संजय मंजुल और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण उत्खनन शाखा द्वितीय की डायरेक्टर डॉ. अरविन मंजुल के निर्देशन में 10 जनवरी को लाक्षागृह पर उत्खनन शुरू किया।
खुदाई के प्रथम चरण में प्रतिदिन कुछ न कुछ पुरावशेष निकल रहे हैं। साफ-सफाई के दौरान टीले के अंदर छह दीवारों और उत्खनन के दौरान मृदभांड, दांत व एक हड्डी निकली है, जो इंसान की बताई जा रही है। दांतों को पशुओं के बताए जा रहे हैं।
लोगों का कहना है कि टीले के अंदर लाक्षा गृह दबा हो सकता है, जहां पांडवों को मारने के लिए कौरवों ने साजिश रची थी। रविवार को डॉ. संजय मंजुल और डॉ. अरविन मंजुल बरनावा पहुंचे और उन्होंने अभी तक निकले पुरावशेषों की जांच की। इसके अलावा उन्होंने सिनौली और चंदायन साइट का भी सर्वे किया। माना जा रहा है कि इन दोनों साइटों पर पहले की तरह उत्खनन शुरू हो सकता है।