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अमर उजाला एक्सक्लूसिव : 70 दिन की बंदी से यूपी में बागपत के स्कूलों में रखी 34 लाख की खाद्य सामग्री बर्बाद

Fri, 02 Jul 2021 07:28 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुकेश पंवार, बागपत

सार

70 दिन तक स्कूल बंद रहने के बाद जब गुरुवार को फिर से सरकार के आदेशों पर स्कूलों को खोला गया, तो जनपद के सभी स्कूलों में रखी तकरीबन 34 लाख रूपयों की खाद्य सामग्री खराब होकर बर्बाद हो गई।
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स्कूल में रखी खराब दाल व आटा - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए भले ही सरकार के आदेश पर शिक्षा विभाग के अफसरों ने जनपद के स्कूलों को बंद करा दिया था, लेकिन ऐसे में शिक्षा विभाग स्कूलों में रखी खाद्य सामग्री को निकलवाना भूल गया। नतीजन स्कूलों की 70 दिन की बंदी से जनपद के स्कूलों में रखी तकरीबन 34 लाख रुपये की खाद्य साम्रगी खराब हो गई। मजबूरन शिक्षकों को खराब साम्रगी फेंकनी पड़ी।

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शिक्षा विभाग के अनुसार जनपद में प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 332, उच्च प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 192 व कम्पोजिट विद्यालयों की संख्या 136 है। जिनमें कुल 70370 बच्चे पंजीकृत हैं।

आपको याद दिला दें कि बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए सरकार के आदेशों पर जनपद के स्कूलों को पिछले 17 अप्रैल को बंद करा दिया गया था, ताकि कोरोना संक्रमण पर काबू पाया जा सके। लेकिन इस दौरान शिक्षा विभाग के अधिकारी स्कूलों मेेंं बच्चों के मिड डे मील के लिए रखे आटे, चावल, दाल, टमाटर, प्याज सहित अन्य खाद्य सामग्री को निकलवाना भूल गया। 
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गुरुवार को को फिर से सरकार के आदेशों पर स्कूलों को खोला गया, तो जनपद के सभी स्कूलों में रखी तकरीबन 34 लाख रूपयों की खाद्य सामग्री खराब होकर बर्बाद हो गई। स्कूलों की रसाईयों मेें टमाटर व प्याज रखे रखे सड़ गए। इनमें भयंकर दुर्गंध उठी हुई थी, वहीं चावल व आटों में कीड़े हो गए। ऐसे में शिक्षकों को खराब सामग्री को फेंकना पड़ा।

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बडौत के गूंगाखेडी गांव के विद्यालय में खराब खाद्य साम्रगी का रिकॉर्ड तैयार करते शिक्षक। - फोटो : amar ujala
इस हिसाब से स्कूलों में बच्चों को मिलती है खाद्य सामग्री 
बता दें कि प्राइमरी स्कूल के प्रति बच्चे को दो किलो राशन मिलता है, जिसमें 1.34 किलो गेंहू व 660 ग्राम चावल मिलता है, जबकि जूनियर स्कूल मेें प्रति बच्चे के हिसाब से दो किलो गेंहू व एक किलो चावल मिलता है। 

इसके अलावा दाल, घी, मसाल व हरी सब्जियां मिलती हैं। जूनियर में प्रति बच्चा 7.45 रूपये व प्राईमरी में 4.95 रूपये प्रति बच्चा मिलता है। ऐसे में अब यदि एक स्कूल मेें खाद्य सामग्री खराब होने का औसत लगाया जाए, तो लगभग एक स्कूल में तकरीबन पांच हजार रूपयों की खाद्य सामग्री बर्बाद हुई। ऐसे में जनपद के कुल 660 विद्यालयों में लगभग 34 लाख रूपयों की खाद्य सामग्री बर्बाद हो गई।

ये बोले एबीएसए 
इस संबंध में जब एबीएसए विनोद वर्मा से बातचीत की गई, तो उन्होंने बताया कि 70 दिनों तक स्कूल बंद होने से काफी खाद्य सामग्री खराब हुई है।

ये बोले पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष 
इसी संबंध में जब पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष नवनीत से बातचीत की गई, तो उन्होंने बताया कि शासन द्वारा स्कूल बंदी के दौरान स्कूलों में रखी खाद्य सामग्री निकलवाने का कोई आदेश नहीं मिला था। ऐसे में जनपद के स्कूलों मेें लाखों रूपयों की खाद्य सामग्री खराब हुई है।
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