बडौत के गूंगाखेडी गांव के विद्यालय में खराब खाद्य साम्रगी का रिकॉर्ड तैयार करते शिक्षक।
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इस हिसाब से स्कूलों में बच्चों को मिलती है खाद्य सामग्री
बता दें कि प्राइमरी स्कूल के प्रति बच्चे को दो किलो राशन मिलता है, जिसमें 1.34 किलो गेंहू व 660 ग्राम चावल मिलता है, जबकि जूनियर स्कूल मेें प्रति बच्चे के हिसाब से दो किलो गेंहू व एक किलो चावल मिलता है।
इसके अलावा दाल, घी, मसाल व हरी सब्जियां मिलती हैं। जूनियर में प्रति बच्चा 7.45 रूपये व प्राईमरी में 4.95 रूपये प्रति बच्चा मिलता है। ऐसे में अब यदि एक स्कूल मेें खाद्य सामग्री खराब होने का औसत लगाया जाए, तो लगभग एक स्कूल में तकरीबन पांच हजार रूपयों की खाद्य सामग्री बर्बाद हुई। ऐसे में जनपद के कुल 660 विद्यालयों में लगभग 34 लाख रूपयों की खाद्य सामग्री बर्बाद हो गई।
ये बोले एबीएसए
इस संबंध में जब एबीएसए विनोद वर्मा से बातचीत की गई, तो उन्होंने बताया कि 70 दिनों तक स्कूल बंद होने से काफी खाद्य सामग्री खराब हुई है।
ये बोले पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष
इसी संबंध में जब पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष नवनीत से बातचीत की गई, तो उन्होंने बताया कि शासन द्वारा स्कूल बंदी के दौरान स्कूलों में रखी खाद्य सामग्री निकलवाने का कोई आदेश नहीं मिला था। ऐसे में जनपद के स्कूलों मेें लाखों रूपयों की खाद्य सामग्री खराब हुई है।