उनका परिवार वर्ष 1947 में बंटवारे के समय पाकिस्तान में जाकर बस गया था। मगर दिल्ली के अलावा उनके परिवार की हवेली व खेती की जमीन कोताना में मौजूद थी। इसमें परवेज मुशर्रफ की जमीन बेच दी गई तो उनके भाई डॉ. जावेद मुशर्रफ की करीब दस बीघा खेती की जमीन बच गई। कोताना की हवेली उनके चचेरे भाई हुमायूं के नाम दर्ज हो गई थी। परवेज मुशर्रफ के भाई डॉ. जावेद मुशर्रफ की जमीन को शत्रु संपत्ति में दर्ज कर दिया गया था, जिसको अब जब्त करने की कागजी कार्रवाई की गई है। इसके साथ ही जमीन का सर्वे किया गया, जिससे उसको नीलाम करने की तैयारी है।
शत्रु संपत्ति निदेशालय से हो रही कार्रवाई
पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के भाई डा. जावेद मुशर्रफ की जमीन को लेकर पूरी कार्रवाई लखनऊ से शत्रु संपत्ति निदेशालय से चल रही है। निदेशालय से पर्यवेक्षक मनोज कुमार सिंह टीम के साथ कुछ दिन पहले कोताना पहुंचे और वहां का सर्वे किया। इसमें अब भू-लेख विभाग की टीम को लगाया गया, जो उसके पूरे कागजात तैयार करने में लगे हुए हैं। परवेज मुशर्रफ के पूर्वज जिसमें रहते थे, वह कभी बहुत बड़ी हवेली थी। अब हवेली की दीवार अभी बची है और सीढ़ी भी दिखाई देती हैं।
टांडा व रटौल की शत्रु संपत्ति का भी सर्वे होगा
कोताना के साथ ही टांडा व रटौल में भी शत्रु संपत्ति है और इन सभी जगह करीब 46 गाटा नंबर शत्रु संपत्ति में शामिल है। इन सभी जगह की शत्रु संपत्ति का सर्वे कराया जाएगा, जिस उसके बाद नीलाम किया जा सके।
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