नेताजी और छोटे चौधरी की मुलाकात से सपा और रालोद के स्थानीय नेताओं की बेचैनी बढ़ गई है। सटीक सूचना के लिए उनकी नजर दिनभर लखनऊ और दिल्ली पर रही।
उन्होंने गठबंधन जैसी किसी भी संभावना को नकार दिया, लेकिन सोशल मीडिया पर चल रहे बयानों ने दिनभर माहौल गरमाए रखा। मंगलवार को राज्यसभा के नामांकन का आखिरी दिन है। सपा जनपद की तीनों सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। चुनाव की तैयारी में जुटे तीनों जनप्रतिनिधि इस बात से अनजान नहीं है कि बात गठबंधन तक पहुंची तो उनके टिकट पर दोबारा मंथन होगा।
इस संबंध में छपरौली के रालोद विधायक वीरपाल राठी का कहना है कि चौधरी अजित सिंह ने सपा और भाजपा से गठबंधन की बात तक नहीं की। कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव मिलने आए थे। इसके बाद अजित सिंह उनके घर गए।
इसी पर अफवाह फैला दी गई कि गठबंधन हो रहा है। जयंत चौधरी एमएलसी बनने की ख्वाहिश रखते तो ऑस्ट्रेलिया क्यों जाते। लगता है कि यह सारी बातें मीडिया में साजिश के तहत फैलाई जा रही हैं। चौधरी अजित सिंह तो राज्यसभा देने वाले नेताओं में रहे हैं। गठबंधन की बात सिर्फ जद यू से हुई थी, अन्य किसी से नहीं।
उधर, राज्य पशुधन विभाग के सलाहकार साहब सिंह कहते हैं कि रालोद से गठबंधन की कोई बात नहीं हुई। फिलहाल ऐसे समीकरण भी नहीं हैं।
दिल्ली में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की पुण्यतिथि पर कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव जरूर चौधरी अजित सिंह से मिलने गए थे, लेकिन इसका गलत मतलब निकाला गया। सपा की ओर से ऐसी कोई पहल नहीं की गई है। सोशल मीडिया पर चल रही सारी बातें भ्रामक हैं।