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रमजान मुबारक में हर रोजे का अगल-अलग इनाम देते हैं अल्लाह

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संवाद न्यूज एजेंसी
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अग्रवाल मंडी टटीरी। मौलाना याकूब ने कहा कि रमजान माह में अल्लाह रोजेदारों को हर रोजे का अलग-अलग इनाम देते है। रोजे में कुरान-ए-पाक पढ़ने और सुनने का ज्यादा सबाब मिलता है।
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उन्होंने बताया कि रोजे की 20वीं रात अल्लाह रोजेदार के लिए जन्नत में महल तैयार करता है। 21वें रोजे को मैदान हश्र के तमाम गम से बरी फरमा देते हैं। 22वीं रात को रोजेदार के लिए जन्नत में आलीशान शहर तैयार करते हैं। 23वीं रात को उसकी 24 दुआएं कबूल होती है। 24वीं रात को उस पर से आजाब कब्र हमेशा के लिए हटा दिया जाता है। 25वीं रात को 40 साल की इबादत का सवाब उसके अमलों में फरमा दिया जाता है। 26वीं रात को पुल सिरात पर से बिजली की तरह गुजर जाने की रोजेदार को बशारत सुना दी जाती है। 27वीं रात को रोजेदार का रुतबा जन्नत में और ज्यादा किया जाता है। 28वीं रात को उसके अमाल में हजार हज का सवाब लिखा जाता है। 29वीं रात को तमाम रातों से ज्यादा इनाम दिया जाता है और कयामत के दिन अल्लाह अपने रोजेदार बंदे से कहता है तुमने मेरे लिए रोजे रखे इसलिए, मैं रोजे का तुम्हें इनाम दे रहा हूं। मौलाना याकूब ने सभी से रमजान माह के रोजे रखने, पांच वक्त नमाज पढ़ने और कुरान-ए-पाक पढ़ने का सुनने का आह्वान किया है।
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