बागपत। राजनीति की बिसात पर सियासी दलों के जिलाध्यक्ष फेल हो गए। भाजपा, सपा, बसपा, रालोद और कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अपने-अपने गांव और शहर में अपनी पार्टी को जीत नहीं दिला पाए। कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष के गांव इदरीशपुर में गठबंधन की सहयोगी सपा को सिर्फ 45 वोट मिले। बसपा के जिलाध्यक्ष जय कुमार जाटव के गांव बरनावा में हाथी की चाल सुस्त नजर आई।
विधानसभा चुनाव के परिणाम सामने हैं। यूपी में सत्ता पर काबिज हुई है भाजपा। हैरान कर देने वाली बात यह है कि भाजपा, सपा, बसपा, रालोद और कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अपने-अपने गांव में अपनी पार्टी को नहीं जिता पाए। भाजपा के जिलाध्यक्ष संजय खोखर कस्बा छपरौली के रहने वाले हैं। कस्बे में रालोद को 3162 वोट मिले, जबकि भाजपा 2186 मतों के साथ दूसरे स्थान पर रही। रालोद के जिलाध्यक्ष ठाकुर प्रदीप सिंह के गांव मीतली में भाजपा 1983 वोट हासिल कर पहले पायदान पर रही, जबकि यहां रालोद को सिर्फ 556 मत मिले। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष राम कुमार चौधरी का गांव छपरौली विधानसभा का गांव इदरीशपुर है। सपा-कांग्रेस गठबंधन से चुनाव लड़ी। इदरीशपुर में सपा-कांग्रेस प्रत्याशी को 45, रालोद को 607, भाजपा को 338 और बसपा को 233 वोट मिले। बसपा के जिलाध्यक्ष जय कुमार जाटव के गांव बरनावा में हाथी की चाल सुस्त रही। बरनावा में सपा को 2198, बसपा को 262, बीजेपी को 715 और रालोद को एक सौ वोट मिले।
भाजपा से पहले प्रदेश की सत्ता पर काबिज रही सपा के जिलाध्यक्ष और बागपत के चेयरमैन राजूद्दीन एडवोकेट भी यहां गठबंधन के साथी कांग्रेस को वोट नहीं दिला पाए। पहले दो राउंड में बागपत की गिनती हुई, इसमें बसपा ने सबसे ज्यादा वोट हासिल किए। दूसरे स्थान पर यहां भाजपा रही। ईवीएम से निकले नतीजे बताते हैं मुख्य राजनीतिक दलों का कोई भी जिलाध्यक्ष अपने-अपने गांव या शहर में अपनी पार्टी को जीत नहीं दिला सका। हालांकि भाजपा ने दो सीटें जीती और रालोद के हिस्से में एक सीट रही।