आज हम आपको ऐसे व्यक्तियों से परिचय कराते हैं, जो पत्नी के निधन के बाद सालों से अहोई पर्व पर निर्जला व्रत रखकर अपने बच्चों की सलामती के लिए कामना करते हैं। इनमें सबसे पहले नाम 85 साल के हो चुके सुखपाल का आता है।
सुखपाल की पत्नी बुगली का वर्ष 2003 में निधन हो गया था। बुगली अपने पीछे एक बेटा व पांच बेटियां छोड़ गई थी। इसके बाद से ही सुखपाल लालन-पालन करने में माता व पिता दोनों का फर्ज व धर्म निभाते आ रहे है।
वह अहोई पर निर्जला व्रत रखते है और अपने बच्चों की सलामती के लिए अहोई माता की महिलाओं की तरह विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। सुखपाल का कहना है कि निर्जला व्रत रखने से भगवान शिव और माता पार्वती प्रसन्न होती हैं और अनहोनी को टालकर संतान को दीर्घायु प्रदान करती हैं और घर में सुख समृद्धि लाती हैं।
इसके अलावा आजाद नगर कालोनी निवासी कृष्णपाल भी अपने बेटों के लिए अहोई का व्रत रखते हैं। कृष्णपाल की पत्नी सवित्री का भी निधन हो गया था। उनके पास दो बेटे हैं, जिनकी सलामती के लिए कृष्णपाल भी अहोई माता का व्रत रखकर बच्चों की लंबी आयु की कामना करते है।