आरोपियों से पूछताछ में सामने आया कि अभियुक्त सरफराज की ननिहाल ग्राम पलडा दोघट में है जिसके कारण वह ग्राम पलडा आता-जाता रहता है।
सरफराज पर थाना मन्सूरपुर, थाना रतनपुर मुजफ्फनगर व थाना गंगानगर जनपद मेरठ से चोरी व लूट आदि के दर्जन भर मुकदमे थे, जिनमें वह कई बार जेल जा चुका है। पुलिस जब सरफराज को तलाश करती, तो वह अपने मामा के ग्राम पलड़ा मे छुपकर रहता है। इसी दौरान सरफराज की दोस्ती मुस्तफा से हो गयी थी।
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करीब चार महीने पहले थाना मंसूरपुर पुलिस द्वारा सरफराज को पुलिस मुठभेड गिरफ्तार किया गया था, इस मुठभेड में सरफराज को पैर मे गोली गली थी। ग्राम पलड़ा के अधिवक्ता जाहिद कचहरी बागपत मे बैठते थे और सरफराज अपने मुकदमों के संबंध मे उनसे सलाह ले लेता था और सरफराज के सभी मुकदमों के बारे मे अधिवक्ता जाहिद को जानकारी थी।
इसी कारण सरफराज को संदेह हो गया था कि अधिवक्ता जाहिद द्वारा मुखबिरी करके मंसूरपुर पुलिस से गिरफ्तार करवाया है। सरफराज ने गिरफ्तारी का बदला लेने के लिए अपने दोस्त मुस्तफा के साथ मिलकर अधिवक्ता जाहिद की हत्या करने की योजना बनाई।
हत्या के बाद अधिवक्ताओं ने हाईवे जाम किया
- फोटो : अमर उजाला
नौ अगस्त को सरफराज जेल से छूटकर आया था। जेल से आने के बाद सरफराज अपने मामा के पास ग्राम पलड़ा में रहकर अपने दोस्त मुस्तफा के साथ मिलकर अधिवक्ता जाहिद की रैकी की और जानकारी लगाई कि अधिवक्ता जाहिद रोजाना अपनी मोटर साईकिल से पुसार से जंगल के रास्ते ग्राम पलड़ा आते-जाते हैं।
30 सितंबर को अभियुक्त सरफराज द्वारा योजना के अनुसार अपने दोस्त मुस्तफा को साथ लेकर पिस्टल व तमंचे से लैस होकर अपनी मोटरसाईकिल अपाचे से गांव पलडा व पुसार के बीच पुलिया के पास टयूबैल पर अधिवक्ता जाहिद के आने का इंतजार करने लगे।
करीब चार बजे के बाद जैसे ही अधिवक्ता जाहिद बाइक पर रास्ते से गुजरे तो उन्हें रोककर मुस्तफा ने पिस्टल से सामने की तरफ से हाथ में तथा सरफराज ने तमंचे से पीछे की तरफ से गर्दन में जाहिद को गोली मार दी।
अधिवक्ता को गोली मारने के बाद दोनों अपराधियों ने पिस्टल व तमंचा मय कारतूस नहर किनारे खेत में छिपा दिये। इसके बाद सरफराज ने मुस्तफा को गांव पलड़ा में छोड दिया और बाइक को भी जंगल में छोडकर अपने गांव पुरबालियान चला गया। अगले दिन सरफराज बस से ग्राम पलड़ा आया और मुस्तफा के साथ अधिवक्ता जाहिद के जनाजे में भी शामिल हुए थे।