जांबाज ट्रैकर वास्संज्ञान चौधरी
- फोटो : अमर उजाला
बड़ौत। बड़ौत के जांबाज ट्रैकर वास्संज्ञान चौधरी ने अब एक ओर विश्व रिकार्ड बनाने का संकल्प लिया है। इससे पहल ट्रैकर वास्संज्ञान चौधरी ने विगत दिनों अपनी दो छोटी बहन(मनस्संजनी (दस) और सूर्यस्संजनी (सात) के साथ 16300 फुट ऊंचे कंचनजंघा बेस कैंप पर तिरंगा फहरा कर विश्व कीर्तिमान बनाया था।
माह जून के पहले सप्ताह में वास्संज्ञान कश्मीर के लद्दाख में स्थित 20.200 फुट ऊंची चोटी स्टोक कांगड़ी पर तिरंगा फहराने की तैयारी कर रहा है। उसने पांच जून 2016 की तारीख इस कठिन और दुर्गम चोटी तक पहुंचने के लिए तय की है। यह हिमालय की जंस्कार पर्वत श्रृंखला की सबसे ऊंची चोटी है। यदि वास्संज्ञान अपना अभियान सफलता पूर्वक पूरा करता है तो वह विश्व का अब तक सबसे कम उम्र का ऐसा करने वाला ट्रैकर होगा।
उसने बताया कंचनजंघा बेस कैंप के मुकाबले स्टोक कांगड़ी मार्ग में और वह विकट परिस्थितियों का सामना करना होगा। स्टोक कांगड़ी की सबसे भयावह परिस्थिति तक आएगी, जब वास्संज्ञान को अंतिम 25 सौ फुट अपने घुटनों पर चलते हुए 75 डिग्री के कोण का सामना करते हुए जमी हुई बर्फ पर चढ़ने होंगे। इसके लिए न केवल वास्संज्ञान ने खड़ी दीवार पर चढ़ने की ट्रेनिंग ली है।
साथ ही उसे बर्फ काटने की कुल्हाड़ी और जूतों में फीट किए जाने वाले नुकीले कैरम्पौन्स जैसे तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल करना भी सीखा है। वास्संज्ञान ने बताया योग से भी अपने मन और शरीर को तैयार किया जा सकता है और अपने लक्ष्य अपने शरीर और दिमाग की सीमाओं को परखना और विकसित करना।
वास्संज्ञान दिल्ली पब्लिक स्कूल सोनीपत में कक्षा सात का छात्र है और वह अपने परिवार के साथ बड़ौत की आवास विकास कॉलोनी में रहता है। वास्संज्ञान के अनुसार वह इस तरह के कठिन अभियान संपूर्ण करते हुए अपने अनुभव और बच्चों के साथ भी बांटना चाहता है, ताकि वे भी इससे प्रेरणा लेकर ऊंचाइयों को पा सकें।