सरूरपुर कलां गांव में धूमधाम के साथ चार दिवसीय श्री 1008 श्री मज्जिनेंद्र आदिनाथ जिनबिम्ब पंच कल्याणक महोत्सव के दूसरे दिन भगवान आदिनाथ के जन्म की क्रियाएं हुईं। सौधर्म इंद्र का नगर भ्रमण हुआ। कार्यक्रम में दूर दराज से श्रद्धालु पहुंचे।
बागपत के दिल्ली-यमुनौत्री हाईवे पर सरूरपुर कलां गांव में प्राचीन जैन मंदिर है। यहां पर श्री 1008 नेमिनाथ भगवान की अतिशयकारी मूर्ति है। मंदिर की नवनिर्मित वेदियों पर श्री सम्मेद शिखर जी और श्री गिरनार जी की रचना प्रदर्शित की जानी है, जिसका पंच कल्याणक महोत्सव शनिवार से शुरू हो गया।
सबसे पहले आदि नाथ की जन्म कल्याण की क्रिया हुई। सौधर्म इंद्र नगर भ्रमण के लिए गया। भगवान आदित्य नाथ की पांडुकशिला का अभिषेक करने हेतु नेमीनाथ वाटिका में स्थित पांडुक शिला पर भगवान आदिनाथ के बाल रूप का 1008 कलश से अभिषेक किया।
यात्रा नोमीनाथ वाटिका से शुरू हुई जो विभिन्न मार्गों से होते हुए वाटिका पर ही आकर संपन्न हुई। पंचकल्याण महोत्सव का अयोध्या नगर स्थापित किया। रथ यात्रा में प्रसिद्ध बैंडबाजे शामिल रहे। पंच कल्याणक महोत्सव आचार्य श्री 108 वसुनंदी मुनिराज के सान्धिय में चल रहा है।
इसमें मुनि शिवानंद जी महाराज, मुनि प्रशमानन्द जी महाराज समेत कई मुनि महाराज पहुंचे। इसमें सुनील जैन, प्रदीप जैन, प्रवीण जैन, रमेश जैन, अमित जैन ऊर्फ बोबी, सुशील जैन सर्राफ बड़ौत, जयचंद जैन, शोभा जैन, अंकुर जैन, प्रगति जैन, विजय जैन, सुमन, सोनू, ममता, चांदराम, सुरेंद्र , राज कुमार, मुकेश जैन आदि रहे।