रटौल। लखनऊ महोत्सव में शुक्रवार को रटौल आम ने प्रथम तीनों पुरस्कार जीतकर न केवल रटौल का गौरव बढ़ाया, बल्कि जिले का स्वाद भी बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी रटौल आम की तारीफ करने से बाग मालिकों का सिर ऊंचा हो गया है। उद्यान राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने तो वीडियो कॉल कर रटौल के बागों का दृश्य देखकर खुद को सरहाना करने में कसर नहीं छोड़ी।
लखनऊ स्थित अवध शिल्प ग्राम अवध विहार में बृहस्पतिवार से छह जुलाई तक आम महोत्सव का आयोजन चल रहा है। रटौल आम उत्पादक हबीब चौहान, अलीना, हुमेरा व सबा चौहान ने वहां रामकेला, मख्सूस, खट्टा मीठा, तोता परी आदि आम सजा रखे है। यहां रटौल आम अपनी गजब की खुशबू और मिठास के लिए छाया हुआ है। यहां देशभर से 850 आम प्रजातियों का प्रदर्शन किया जा रहा है। रटौल कस्बा निवासी आम उत्पादक हबीब चौहान के रटौल आम को प्रथम व दूसरा स्थान मिला। जबकि रटौल के ही सबा चौहान के आम को तीसरा स्थान मिला। पहले तीनों पुरस्कार रटौल को मिलने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रटौल आम की तारीफ कर आम उत्पादकों का हौसला बढ़ाया। बाग के मालिकों को उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। उद्यान राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने हबीब चौहान से रटौल आम की पूरी जानकारी ली। इसके बाद राज्यमंत्री ने वीडियो कॉल कर रटौल आम के बागों का दृश्य देखा और रटौल आम का स्वाद चखने के बाद खूब तारीफ कर रटौल आने की भी बात कही।
महक रही आम की डेढ़ सौ प्रजातियां
बागपत के कस्बा रटौल में करीब 500 एकड़ जमीन पर आम बाग है। यहां 150 से ज्यादा आम की प्रजातियां मौजूद है। रटौल प्रजाति का आम रटौल में ही इजाद किया गया था। पूर्व में देश के कई दिग्गज नेता और फिल्मी सितारे रटौल के बागों में आकर आम का स्वाद चख चुके हैं। आम का स्वाद चखने वालों में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिजारी वाजपेयी भी रहे।
विदेशों में रटौल आम की मांग
आम खाने के शोकीन रटौल आम को 200 से 250 रुपये किलो तक खरीद रहे है। रटौल आम की लगातार मांग बढ़ती जा रही है। आम व्यापारी रटौल कस्बा के बाहर से आसपास के गांवों से रटौल प्रजाति का आम लाकर यहां बेच रहे हैं, लेकिन मांग इतनी ज्यादा है कि मांग पूरी करना ही मुश्किल हो रहा है। विदेशों तक में रटौल आम की मांग है।
पहले भी मिला पहला स्थान
वर्ष 2023 में लखनऊ आम महोत्सव में रटौल आम प्रथम स्थान पर रहा था। हर वर्ष रटौल के हबीब चौहान, सबा चौहान, कलाम चौधरी दिल्ली, लखनऊ तथा अन्य स्थानों पर लगने वाली आम प्रर्दशनी में रटौल का आम ले जाकर अपनी पहचान को बरकरार रखे हुए हैं।