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एक बालक की आंखों में दिवाली को मरते देखा

Sat, 25 Oct 2014 05:31 AM IST
Baghpat
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खेकड़ा। दीपावली, गोवर्धन, भैयादूज के चलते आयोजित काव्य गोष्ठी में कवियाें ने त्योहारों की महत्ता पर प्रकाश डाल सभी को भाव विभोर कर दिया। साथ ही समाज के लिये सराहनीय योगदान करने पर डॉ. नरेश शर्मा को सम्मानित किया।
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शुक्रवार को नगर में लोक साहित्य संस्कृति समिति की ओर से दीपावली, गोवर्धन, भैयादूज त्योहाराें को लेकर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसका शुभारम्भ सरस्वती वंदना के साथ हुआ। कवि राकेश आचार्य ने कहा कि ज्ञान की ज्योति जगाने वाली, अंधकार को मिटाने वाली, मोती हंस हैै प्रिय सवारी, श्वेत कमल पर मां पधारी। कवि गजेंद्र गजानन ने कहा मां सरहद से मोदी जी का संदेश आया है, सरहद पर जवानों का हौैसला बढ़ाया है। कवि परीक्षित चंदगीराम ने कहा पटाखों की दुकान से दूर हाथों में सिक्के गिनते देखा, एक बालक की आंखों में मैने दीवाली को मरते देखा। कवि अक्षय शर्मा ने कहा जिंदगी नदियों सी बहती रही, मैं मोती सा कही रुक गया, आंखें खुली रही पर सपना फिर भी बुन गया। कवि नगेंद्र द्विवेदी ने कहा उड़ रहे हैं स्वार्थ भंवरे, धन पुष्प पर मंडरा रहे, हेम किरणों की ललक में खो गई सीता कहीं। कवि सुमित सूर्य ने कहा आंसू भी सूखे तो क्या पत्ता पत्ता डाली डाली, बरगद भी सूखा तो क्या, जडे़ शेष जमीं में बाकी हैं। कवि दाताराम मिश्रा ने बोले अट्ठारह सौै सत्तावन के वीर शहीदों तुम्हें नमन है, मंगल पांडे तुम्हें नमन है, लक्ष्मी बाई तुम्हें नमन है। गोष्ठी में समाज केे लिये सराहनीय योगदान देने वाले चिकित्सक डॉ. नरेश शर्मा को धार्मिक पुस्तकें भेंट कर सम्मानित किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता दाताराम मिश्र और संचालन पूर्व प्रधानाचार्य ब्रजेंद्र मणि त्रिपाठी ने किया।
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