बागपत। भाजपा के डॉक्टर सत्यपाल सिंह ने बागपत में नया इतिहास रच दिया है। अजित सिंह को हराया ही नहीं है, तीसरे नंबर पर पहुंचा दिया है। जीते भी इतनी शान से हैं कि पांचों विधान सभाओं में पहला नंबर। वोट भी इतने मिले, जितने आज तक किसी को नहीं मिले। जीत का अंतर भी दो लाख से अधिक। बागपत की चौधराहट को नया चेहरा मिल गया है। उम्मीदों का नया सवेरा निकला है पिछड़े हुए जिले में। जिस भाजपा के उम्मीदवार जमानत तक नहीं बचा पा रहे थे, वो आज पहले नंबर की पार्टी बनकर इतरा रही है।
दो साल पहले की बात है। बागपत विधान सभा सीट पर भाजपा के नीरज शर्मा को पीस पार्टी से कम वोट मिले थे। पांचों सीटों पर भाजपा की जमानत जब्त हो गई थी। कोई सोच भी नहीं सकता था कि यहां कमल खिल सकता है। दिक्कत यह भी थी कि यहां संगठन बहुत मजबूत नहीं था लेकिन सत्यपाल सिंह की अपनी टीम बहुत ताकतवर ही नहीं, समझदार भी थी। उनके परिवार ने भी रात दिन एक कर दिए। उनकी पत्नी, उनकी बेटी, उनका बेटा सबने अपनी भूमिका निभाई।
भाजपा नेता बताते हैं कि सत्यपाल सिंह बाबा रामदेव के करीबी हैं। उन्हें राजनीति में लाने के पीछे बाबा की बड़ी भूमिका रही। उनके लिए वोट मांगने भी आये थे योगगुरु। बागपत में भाजपा का कोई विधायक भी नहीं है। जाहिर है आगे की राजनीति और रणनीति सत्यपाल सिंह ही तय करेंगे।
मंत्री बन सकते हैं सत्यपाल सिंह
सत्यपाल सिंह सांसद तो बन गए, अब मंत्री भी बन सकते हैं। उन्होंने अजित सिंह को जो हराया है। जब अजित सिंह 1998 में हारे थे, तब उन्हें हराने वाले सोमपाल शास्त्री भी मंत्री बने थे। उनकी जीत 44 हजार वोटों की थी जबकि सत्यपाल जीते हैं 2.10 लाख वोटों से। इसके अलावा वे मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर भी हैं। माना जा रहा है कि उन्हें मोदी के मंत्रीमंडल में जगह मिल सकती है।
अजित सिंह पर कुछ नहीं कहना
सत्यपाल सिंह से जब अजित सिंह की हार पर सवाल किया गया, तो बोले, नहीं, उनके बारे में कुछ नहीं कहना है। वे बड़े आदमी हैं, मैं बहुत छोटा हूं।