बागपत। भेल कंपनी की एक भारी भरकम टरबाइन ने यूपी-हरियाणा सीमा पर गौरीपुर के पास तीन घंटे के लिए यातायात को थामकर रख दिया। हजारों वाहन इस दौरान फंसे रहे। 128 टायरों के बेस पर रखकर ले जाई जा रही इस मशीन को यमुना पार कराने के लिए अलग से नदी के अंदर ही मिट्टी का रास्ता बनाया गया। डर था कि अगर इसे नदी पर बने पुल से गुजारा गया तो यह टूट जाएगा।
इस टरबाइन के साथ कंपनी का 25 कर्मचारियों का स्टाफ चल रहा है। इन लोगों ने बताया कि यह टरबाइन बिजली उत्पादन में इस्तेमाल की जाती है। इसे हरिद्वार से गुजरात ले जाया जा रहा है। गुुरुवार को यह बागपत से होकर गुजरी। इसके रास्ते में यमुना आ रही थी। इसके चलते प्रशासन से अनुमति लेकर नदी के अंदर मिट्टी का पुल बनाया गया। इससे होकर जब यह गौरीपुर-बहालगढ़ मार्ग पर सुबह करीब 11 बजे पहुंची तो वहां जाम लग गया। सैकड़ों वाहन बागपत की ओर फंस गए। इतनी ही लंबी लाइन सोनीपत की तरफ भी लग गई। करीब तीन घंटे में यह मशीन सड़क के एक किनारे पर पहुंची, तब जाकर जाम खुला। मशीन को तीन बड़े ट्रक खींच रहे हैं। इनमें से एक ट्रक को चला रहे रियाज का कहना था कि उसे भी नहीं मालूम कि मशीन गुजरात कब पहुंचेगी।
स्टाफ में शामिल वायरमैन आलम का कहना था कि जहां-जहां रास्ते में नदी पड़ेगी, वहां इसी तरह अस्थाई रास्ता बनाना पड़ेगा। उधर, यमुना में मिट्टी का रास्ता बनाए जाने के बारे में डीएम अमृता सोनी का कहना था कि इसके लिए संबंधित विभागों से एनओसी इस शर्त पर दी गई थी कि मशीन गुजरते ही रास्ता तोड़ दिया जाएगा।