बागपत। जैनाचार्य ज्ञान सागर महाराज ने कहा मोह के विनाश का नाम मोक्ष है। बुराइयों और विकारों के परित्याग के बिना मोक्ष की कल्पना नहीं की जा सकती। मोक्ष कल्याणक के बाद प्रतिमाओं को पूजा अर्चना के बाद मंदिर में स्थापित कराया।
रिवर पार्क स्थित भगवान पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर के चल रहे पंचकल्याणक महोत्सव का बुधवार को समापन हो गया। अंतिम दिन मोक्ष कल्याण महोत्सव मनाया गया। जैनाचार्य ज्ञान सागर महाराज ने कहा कि व्यक्ति को अपने जीवन में भी बदलाव लाकर जीवन को सफल बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सकारात्मकता का नाम अध्यात्म की ओर बढ़ता है। जबकि नकारात्मकता को धर्म से विमुख होना कहा जा सकता है। मंदिर में बैठे त्रिलोकी नाथ की आराधना से हम बड़ी से बड़ी परेशानी, बीमारी और प्रतिकूलता से पार पा सकते हैं। भगवान की भक्ति, जहां हमारी आत्मा को विशुद्ध करती हैं, वहीं हमारे शरीर को भी स्वस्थ करती है। मोक्ष कल्याणक में आचार्य श्री ने कहा कि मोह के रहते मोक्ष की कल्पना नहीं की जा सकती है। वहीं बुराई और विकारों के रहते हम अध्यात्म की ओर कदम नहीं बढ़ा सकते हैं। मोक्ष प्राप्त करने के बाद जीवन, जन्म और मरण के झंझटों से मुक्त हो जाता है। सम्यक दर्शन, ज्ञान और चरित्र ही मोक्ष मार्ग बताया गया है। राकेश मित्तल ने बताया कि मोक्ष कल्याण के अनुष्ठान पूजा अर्चना के बाद भगवान आदिनाथ, शांतिनाथ, महावीर स्वामी की प्रतिमा को विधि विधान के साथ मंदिर में स्थापित किया। रिवर पार्क तक प्रतिमाओं की शोभायात्रा निकाली। शोभायात्रा में बैंडबाजे शामिल रहे। इसमें डॉ. श्रेयास कुमार जैन, जय निशांत शास्त्री, अशोक शास्त्री, पंडित हंसराज जैन के निर्देशन में प्रतिमाएं स्थापित कराई गई। नागेंद्र गोयल, ईश्वर जैन, प्रमोद जैन, शिखर चंद जैन, परस जैन, आनंद जैन, बिजेंद्र जैन, संदीप जैन आदि रहे।