बागपत। पिछले आठ साल से पश्चिम उत्तर प्रदेश की सियासत का मुद्दा बने दिल्ली-सहारनपुर हाईवे के दिन बहुरने की उम्मीद जग गई है। 155.125 किमी हाईवे निर्माण की अनुमानित लागत 1505.72 करोड़ रुपये है। पहले चरण में ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे से शामली बाईपास तक 61.409 किमी सड़क का निर्माण होगा।
11 सितंबर को केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी एवं यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बड़ौत में दिल्ली-सहारनपुर हाईवे के लिए भूमि पूजन करेंगे। 22 नवंबर 2017 को यूपी सरकार ने केंद्र को एनओसी दी थी। एनएचएआई ने हाईवे के निर्माण के लिए खाका तैयार कर लिया है। बागपत में ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे से हाईवे का निर्माण शुरू होगा और पहले चरण में यह शामली बाईपास तक होना प्रस्तावित है। 61.409 किमी के हिस्से की अनुमानित लागत 726.33 करोड़ है। शामली बाईपास से सहारनपुर तक मार्ग की लंबाई 62.779 है, जिसकी अनुमानित लागत 779.39 करोड़ रुपये है। दिल्ली में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या नौ से लोनी होते हुए ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे तक के टुकड़े का निर्माण तीसरे चरण में कराया जाएगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से पहले उपशा को इसका निर्माण कराना था, तब हाइवे 206 किमी बनाया जा रहा था, लेकिन सहारनपुर जिले में इसके हिस्से को कम किया गया है।
455 करोड़ का घपला, चल रही सीबीआई जांच
बागपत। दिल्ली-सहारनपुर हाइवे के निर्माण में 455 करोड़ रुपये डकार लिए गए थे। स्टेट हाइवे में जगह-जगह गड्ढे हैं। जिले से करीब 51 किमी के टुकड़े से गुजरना आसान नहीं है।
फोरलेन प्रस्तावित हाइवे पर निर्माण की शुरूआत 30 मार्च 2012 को हुई थी। ठेकेदार कंपनी के डायरेक्टर्स समेत अन्य लोगों के खिलाफ 455 करोड़ के घपले का मुकदमा दर्ज हो चुका है। हाइवे में गड्ढे इतने कि सरूरपुर कलां से गुजरना ही मुश्किल है। इसके अलावा बड़ौत में हालात बेहद खराब है। बावली, कासिमपुर, रमाला और ककड़ीपुर तक गहरे गड्ढे पोल खोल रहे हैं। तीस मार्च 2012 को निर्माण कार्य शुरू होने के बाद बागपत जिले में करीब सात हजार पेड़ काटे गए। सिसाना और सरूरपुर कलां जैसे गांवों में लोगों के मकानों पर बुलडोजर चला। जिले की सीमा में किसी पुलिया तक निर्माण अधूरा है। ठेकेदार कंपनी ने आखिरी बार गाजियाबाद के लोनी में फ्लाईओवर निर्माण का कार्य किया था। नवंबर 2013 में यहां भी काम रोक दिया गया, इसके बाद कोई कार्य नहीं किया गया।