बागपत। तीन सदी के युगदृष्टा शिक्षा ऋषि स्वामी कल्याण देव की जयंती किरठल में धूमधाम से मनाई जाएगी। उनका जन्म ननिहाल के कोताना गांव में हुआ था। पालन पोषण मुजफ्फरनगर के मुंडभर गांव में हुआ। शिक्षा का उजियारा फैलाने वाले संत ने देश में सैकड़ों शिक्षण संस्थाएं खोली। संन्यास के बाद वह कभी अपने पैतृक और ननिहाल के गांव लौटकर नहीं गए।
किरठल गांव में बृहस्पतिवार को शिक्षा ऋषि स्वामी कल्याण देव की जयंती मनाई जाएगी। मेधावी छात्र-छात्राओं के अलावा समाज के गणमान्य लोगों का सम्मान किया जाएगा। कोताना की भोई देवी का विवाह मुजफ्फरनगर के मुंडभर गांव में हुआ था। जिस वक्त कल्याण देव का जन्म हुआ, तब भोई देवी कोताना स्थित मायके में आई हुई थी। कुछ दिन बाद वह पुत्र के साथ ससुराल मुजफ्फरनगर के मुंडभर गांव लौट गई। शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों के लिए स्वामी कल्याण देव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां मिली। गांव और गरीब की सेवा को उन्होंने जीवन का उद्देश्य बना लिया। जीवन पर्यंत वह लोगों की सेवा में जुटे रहे।
एतिहासिक गांव है कोताना
बागपत। बड़ौत के निकट बसा कोताना गांव कई मायनों में खास है। स्वामी कल्याण देव के जन्म और ननिहाल के कारण गांव को पहचान मिली। इसके अलावा पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ का ननिहाल भी इसी गांव में बताई जाती है। ग्रामीण दावा करते हैं कि उनकी पुरानी हवेली अभी तक इसी गांव में सुरक्षित है। सरधना की बेगम समरू का जुड़ाव भी कोताना से रहा।
ग्रामीणों ने कहा यहां बने शिक्षण संस्था
बागपत। पूर्व प्रधान मुकीद, जमीर, मोनू कश्यप, वीरसैन कश्यप, हरिराम कश्यप का कहना है कि गांव में 10वीं की पढ़ाई की भी व्यवस्था नहीं है। बच्चों को बड़ौत जाना पड़ता है। गांव में इंटर कॉलेज का निर्माण होना चाहिए। बेटियों के लिए अलग से शिक्षण संस्था भी खुलें।