बागपत। कुशीनगर में रेल हादसे के बाद जिले में सूजरा और गाधी गांव के ग्रामीण भी सहमे हुए हैं। मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग से रोजाना जिंदगी दांव पर लगाकर गुजरते हैं। रस्सीवाला फाटक ऐसा है, जिसे ट्रेन के हॉर्न के बाद ही जानकारी होती है कि रेल आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि मौत वाले क्रॉसिंग बंद होने चाहिए।
सूजरा के पूर्व प्रधान योगेंद्र सिंह का कहना है कि कई बार रेलवे के अधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है। लेकिन कोई सुनने के लिए तैयार नहीं है।
खेड़की के संजीव शर्मा का कहना है कि बच्चों की ही नहीं यहां तो बड़ों की जान को भी खतरा रहता है। सबसे ज्यादा मुसीबत तो रात के समय होती है। गेट बनाकर नियमित कर्मचारी की ड्यूटी लगाई जानी चाहिए।
ढोढरा के साजिद का कहना है कि जिले के जनप्रतिनिधियों को इस बात पर गौर करनी चाहिए। आखिर वह वोट लेने आते हैं, लेकिन इसके बाद जनता को भूल जाते हैं।
सूजरा के नत्थूराम का कहना है कि केंद्र सरकार को यह कदम उठाना चाहिए। आखिर लोगों की जिंदगी दांव पर लगी है।
सूजरा में बन रहा अंडर पास
बागपत। अमर उजाला ने पिछले वर्ष सूजरा में मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग का मुद्दा उठाया था। वर्तमान में यहां पर निर्माण का कार्य चल रहा है। दो माह में अंडर पास बनकर तैयार हो जाएगा।
लोनी से टपरी तक 25 मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग
बागपत। लोनी (गाजियाबाद) से टपरी (सहारनपुर) तक करीब 25 मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग हैं, इन पर लोग जिंदगी दांव पर लगाकर गुजरते हैं।