बागपत। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे से जिले को निश्चित तौर पर लाभ होगा, लेकिन दिल्ली-सहारनपुर हाइवे के गड्ढे अभी भी जिले की सबसे बड़ी समस्या है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह की पहल के बाद हाइवे को उपशा ने एनएचएआई को हैंडओवर कर दिया है। सरकार के चार साल बीत जाने के बावजूद यह हाइवे बागपत की सबसे बड़ी समस्या है। लोकसभा चुनाव 2014 और विधानसभा चुनाव 2017 में यह हाइवे सबसे बड़ा मुद्दा रहा है। प्रत्येक राजनीतिक दल के मंच पर हाइवे की गूंज रही। छपरौली में यमुना नदी का पुल भी पिछले दो दशक से मुद्दा है। विधानसभा चुनाव 2017 से पहले हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने इसका उद्घाटन किया था, लेकिन निर्माण कब होगा यह कोई नहीं जनता। किसानों के गन्ने का बकाया भुगतान जिले में बड़ा मुद्दा है। करीब सात सौ करोड़ रुपये चीनी मिलों पर बकाया है। भाजपा नेताओं के तमाम दावे और कार्रवाई के बाद भी भुगतान नहीं मिल सका है। स्थानीय स्तर पर बस स्टैंड और शिक्षा और मेडिकल की सुविधाएं नहीं है।
करोड़ों रुपये के तोहफों की बंधी आस
बागपत। पीएम नरेंद्र मोदी से जनसभा में करोड़ों रुपये के विकास कार्यों की उम्मीद बंधी है। सोनीपत-गढ हाइवे, बागपत चीनी मिल का विस्तारीकरण, बड़ौत में यूनिवर्सिटी, मेडिकल कॉलेज समेत करोड़ों रुपये की घोषणाओं की उम्मीद है।