सर्दी में पशुओं की भी बिगड़ रही सेहत
बागपत। सर्दियों का मौसम मवेशियों पर भी भारी पड़ रहा है। बुखार, थनेला और खुरपुका-मुंहपका ने पशुओं को चपेट में ले लिया है। इससे पशुपालक चिंतित हैं। पशु चिकित्सकों का कहना है कि संतुलित आहार और देखभाल की से बीमारियों से निजात मिलेगी। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजपाल सिंह ने कहा कि सर्दी से मवेशियों में निमोनिया बुखार, थनेला, खुरपका और मुंहपका रोग बढने की ज्यादा संभावना होती है। ऐसे में मवेशियों को हर रोज 200-250 ग्राम गुड़, बिनौले खिलाने चाहिए। रात के समय मवेशियों के नीचे सूखे ईख की पत्तियां या पेड़ के पत्ते डालें।
उन्होंने कहा कि पशुओं को धूप निकलने पर ही बाहर निकालें, शीतलहर से बचाएं, हैंडपंप का हमेशा ताजा पानी पिलाया जाए। उन्होंने कहा कि हरा चारा सीमित मात्रा में डाले। सूखे भूसे में सरसों का इस्तेमाल करें। हो सके तो रात में अलाव की व्यवस्था करनी चाहिए। बीमारी होने पर चिकित्सक से उपचार करवाएं।
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पशुओं को दें संतुलित आहार
बागपत। सीवीओ डॉ. राजपाल ने बताया कि सर्दियों के दिनों में ज्यादातर गाय-भैंस दूध दे रही होती हैं। इसलिए उनको दुग्ध उत्पादन के अनुपात के अनुसार उन्हें संतुलित आहार देने की आवश्यकता होती है। संतुलित आहार बनाने के लिए 35 प्रतिशत खल, दालों और चने का चोकर 20 प्रतिशत और खनिज लवण मिश्रण दो और नमक तीन प्रतिशत मात्रा में लेकर तैयार किया जा सकता है।
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थनेला से बचाव
बागपत। सर्दियों में दुधारू पशुओं के अक्सर थन चटक जाते हैं या थनों में सूजन आ जाती है। इससे दूध दोहन में परेशानी के साथ ही थनैला बीमारी पनपने की आशंका बन जाती है। इसके बचाव के लिए दूध निकालने के बाद कम से कम आधा घंटा पशुओं को जमीन पर बैठने ना दें। थनेला रोग के बचाव के लिए थनों को पोटेशियम परमेग्नेट के घोल से साफ करना चाहिए।