छपरौली (बागपत)। ककौर गांव के यमुना खादर के निकट शिकारी के खटके (शिकंजे) में फंसा तेंदुआ ग्रामीणों ने तो जिंदा बचा लिया, लेकिन दस घंटे बाद वन विभाग की सुपुर्दगी में इसकी मौत हो गई। दिन भर तमाशा बने इस तेंदुए की मौत को लेकर कई बातें सामने आ रही हैं, लेकिन मौत के सही कारणों का पोस्टमार्टम के बाद ही पता चलेगा, जिसके लिए आईवीआरआई (इंडियन वेटनेरी रिसर्च इंस्टीट्यूट) बरेली की टीम को बुलाया गया है और तब तक तेंदुए के शव को डीप फ्रिजिंग तापमान में रखा गया है।
ककौर के जंगल में जंगली सूकर पकड़ने के लिए किसी शिकारी ने खटका लगा रखा था । मंगलवार सुबह साढे़ छह बजे किसान भगत खेत में पहुंचा तो खटके में फंसा तेंदुआ गुर्रा रहा था। किसान गांव की तरफ भागा और सूचना दी तो सैकड़ों लोग वहां पहुंचे। दो साल के इस नर तेंदुए का पैर खटके में फंसा हुआ था। पुलिस और वन विभाग को सूचना दी गई। मौके पर छपरौली पुलिस ने वीडियो और फोटोग्राफी करने वालों को वहां से दूर हटाया।
वन विभाग की टीम करीब साढे़ 11 बजे पहुंची और ग्रामीणों की मदद से तेंदुए को जाल में डाल लिया। वनकर्मी और ग्रामीण इसे जाल में ही लाठी डंडों से दबाकर बैठ गए। मौके पर सैकड़ों लोग एकत्र थे। करीब डेढ़ बजे वन विभाग के लोग पिंजरा लेकर आए। तब तक तेंदुए को तीन बार बेहोशी के इंजेक्शन दिए जा चुके थे।
ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग की टीम तेंदुए को पिंजरे में जिंदा लेकर गई थी, लेकिन शाम करीब चार बजे बड़ौत रेंज में पहुंचने पर उसकी मौत हो गई। डीएफओ अनिल कुमार मिश्रा का कहना है कि मौत के कारणों का पोस्टमार्टम के बाद ही खुलासा हो सकेगा। वहीं, ग्रामीणों का आरोप है कि बेहोशी के इंजेक्शन की ओवरडोज से तेंदुए की मौत हुई है। जबकि, वन विभाग के लोग तर्क दे रहे हैं कि घंटों तक जाल में जकड़ने और लाठी-डंडों से दबाए रखने के कारण तेंदुए की मौत की संभावना है। सीवीओ डा. राजपाल सिंह ने बताया कि तेंदुए का पोस्टमार्टम बुधवार को टीम करेगी। इसके लिए इंडियन वेटनेरी रिसर्च संस्थान बरेली से टीम बुलाई गई है।