बागपत। पुलिस पर चार राज्यों के अपराधियों का गठजोड़ भारी पड़ रहा है। उत्तराखंड, यूपी, हरियाणा और दिल्ली के शातिरों ने पुलिस की नाक में दम कर दिया है। सुनील राठी और रामवीर शौकीन की नजदीकियों के बावजूद पुलिस साजिश को नहीं भांप सकी। पूर्व विधायक को सिर्फ एक एसआई और दो सिपाहियों के साथ चेकअप के लिए भेजने की चूक से शौकीन को मौका मिल गया।
मुन्ना बजरंगी हत्याकांड में नामजद सुनील राठी के गिरोह की सक्रियता उत्तराखंड़ में है। गैंग से यूपी, उत्तराखंड़, हरियाणा और दिल्ली के शातिर जुड़े हुए हैं। भूरा फरारी केस में इसी गिरोह का गठजोड़ देखने को मिला था। उत्तराखंड़ पुलिस भी गैंग की साजिश को भांपने में नाकामयाब रही थी। राठी गैंग के तार दिल्ली के नीरज बवाना से जुड़े हैं। अपने मामा रामवीर शौकीन को चुनाव लड़ाने की जिम्मेदारी नीरज बवाना ने ही संभाली थी, यही नहीं बवाना ने अपनी मामी को भी चुनाव लड़ाया और वह दिल्ली से पार्षद भी है। हरियाणा के युवक भी राठी गैंग के संपर्क में है और बजरंगी की हत्या के बाद पुलिस ने इसकी छानबीन भी की थी। पुलिस शातिरों का नेटवर्क तोड़ने में नाकामयाब रही है। यही वजह है कि पहले भूरा फरार हो गया और अब रामवीर शौकीन। बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या कर दी गई, लेकिन पुलिस के हाथ खाली रहे। पुलिस की बड़ी चूक यह भी रही कि पूर्व विधायक के साथ दिल्ली में चेकअप के लिए सिर्फ एक एसआई और दो सिपाही भेजे गए थे। जबकि नीरज बवाना गैंग की दिल्ली में अधिक सक्रियता है।