दोघट (बागपत)। चकबंदी में गलत तरीके से चक काटने और अधिकारियों पर अनसुनी का आरोप लगाकर बामनौली गांव में किसान शुक्रवार को मोबाइल टॉवर पर चढ़ गया। उसने कहा जब तक इंसाफ नहीं मिलेगा, वह टॉवर से नहीं उतरेगा। किसान के टावर पर चढ़ने की सूचना मिलते ही एसडीएम बड़ौत सहित सैकड़ों ग्रामीण और पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे। एसडीएम ने बातचीत कर करीब साढ़े पांच बजे किसान को टॉवर से उतारा। उन्होंने कहा किसान को न्याय दिलाया जाएगा।
बामनौली गांव के राम कुमार (50) पुत्र अतर सिंह के हिस्से में 40 बीघा जमीन है। चकबंदी के दौरान उसके तीन जगह चक काट दिए । उसका ट्यूबवेल भी दूसरे किसान को दे दिया गया। किसान राम कुमार की आपत्ति का मामला एसओसी कोर्ट में लंबित है। शुक्रवार को राम कुमार एसओसी कोर्ट में सुनवाई के बाद घर पहुंचा और परिजनों को बताया कि उनके प्रकरण की सही सुनवाई नहीं हो रही है। दोपहर दो बजे वह गांव में ही मोबाइल कंपनी के 70 फुट ऊंचे टॉवर पर चढ़ गया। थोड़ी ही देर में सैकड़ों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। बामनौली चौकी की पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन किसान ने नीचे उतरने से इंकार कर दिया। थानाध्यक्ष चितवन कुमार मौके पर पहुंचे और किसान ने मोबाइल पर वार्ता की। उन्होंने कहा किसान को बताया मामले की एसडीएम को सूचना दे दी है।
सूचना मिलते ही एसडीएम बड़ौत अरविंद कुमार द्विवेदी शाम करीब पांच बजे बामनौली गांव में पहुंचे और किसान के परिवार से बातचीत की। साथ ही चकबंदी विभाग के अधिकारियों से बातचीत की। एसडीएम ने आंदोलनकारी किसान से वार्ता की। एसडीएम के कहने पर किसान टावर से उतर गया। एसडीएम ने किसान के साथ बामनौली पुलिस चौकी में वार्ता की। इसके अलावा करीब 15 किसानों ने भी एसडीएम को चकबंदी समस्या बताई। एसडीएम ने कहा किसानों को इंसाफ दिया जाएगा। एसडीएम की सूचना पर एसओसी अजय प्रकाश उपाध्याय गांव में पहुंचे, लेकिन किसानों की भीड़ को देखकर दंबे पांव लौट गए। एसओसी की कार्यशैली पर किसानों में गुस्सा है। एसडीएम ने समझा बुझाकर किसानों के शांत किया। इसके बाद पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने राहत की सांस ली।
बामनौली में आत्महत्या कर चुका किसान
दोघट। चकबंदी में आठ बीघा जमीन के गलत बंटवारे से आहत होकर बामनौली के किसान कृष्णपाल ने पिछले साल चार दिसंबर को जहरीला पदार्थ निगल लिया था। इलाज के दौरान मेरठ में उसकी मौत हो गई। परिजनों का कहना था कि किसान के पास आठ बीघा जमीन थी। चकबंदी में उसके आठ बीघा जमीन के चक को दो स्थानों पर काट दिया। एक जगह तीन बीघा और दूसरी जगह पांच बीघा जमीन दी गई। चकबंदी अधिकारियों से इसका विरोध भी किया और अपने आठ बीघा जमीन के चक को एक ही जगह काटने के लिए कहा था, लेकिन किसान की पीड़ा की अनदेखी की गई। जिसके चलते किसान ने आत्महत्या कर ली थी।