दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म को अंगीकार किया
बड़ौत (बागपत)। जैन समाज के चल रहे दशलक्षण पर्व के दूसरे दिन मंदिरों में उत्तम मादर्व धर्म को अंगीकार कर विशेष पूजा अर्चना की। रात के समय मंदिरों में धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन किए।
दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में जैन मुनि अनुमान सागर के सानिध्य में दशलक्षण पर्व के दूसरे दिन दिगंबर जैन युवा मंच द्वारा आयोजित तेरहदीप महामंडल विधान में श्रद्धालुओं ने चंद्रप्रभु भगवान का अभिषेक विधि-विधान पूर्वक किया। इसके बाद नित्य नियम और दशलक्षण धर्म की पूजा संगीत की मधुर धुनों के बीच भक्ति पूर्वक की गई। पंडित अमर चंद जैन ने बीच-बीच में तेरह दीप महामंडल विधान की महत्ता पर प्रकाश डाला। विधान के बीच-बीच में श्रद्धालुओं ने नृत्य कर भावना व्यक्त की।
इसके अलावा दिगंबर जैन छोटा मंदिर में दिगंबर जैन अतिथि भवन में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं द्वारा 10 दिन तक निर्जल उपवास, एकासना तथा विशेष धर्म साधना शुरू की । इन 10 दिनों में की भक्ति का अलग ही सुख होता है। दिगंबर जैन अतिथि भवन में दोपहर को पंडित अमर चंद जैन ने तत्वार्थ सूत्र की वाचना की। सायंकाल सभी मंदिरों में विशेष आरती और भजन के कार्यक्रम हुए। जैन बड़ा मंदिर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति की। इसमें प्रवीण जैन, अतुल जैन, नवीन जैन, विपिन जैन, रमेश जैन, शील चंद जैन, अमित जैन, प्रवीण जैन, अनुज जैन, अतुल जैन, विजय जैन, सतीश जैन, गौरव जैन, दिनेश जैन आदि रहे।
जहां अहंकार, वहां मिलन नहीं - अनुमान सागर
बड़ौत। दिगंबर जैन अतिथि भवन में आयोजित धर्मसभा में अनुमान सागर महाराज ने कहा आज को मारना ही मार्दव धर्म को स्वीकार करना है। अहंकार के भाव से मुक्ति हुआ व्यक्ति परमात्मा को उपलब्ध होता है। अहंकार की दीवार स्वयं के भीतर जाने नहीं देती। अहंकार के कारण विवाद, निषाद, संघर्ष आदि फैलता है। जहां अहंकार है, वहां मिलन नहीं है। मात्र दुख ही वहां प्राप्त होता है। अहंकार की भावना मनुष्य को मनुष्य तत्व के गुणों से रीत रखता है।
उत्तम मार्दव धर्म की पूजा की
बड़ौत। अजित नाथ दिगंबर जैन मंदिर कमेटी के सौजन्य से आचार्य सुंदर सागर महाराज के संसघ सानिध्य में उत्तम मार्दव धर्म की पूजा की और उसे अंगीकार किया । विहर्ष सभागार, सत्यवती जैन धर्मशाला में आचार्य सुंदर सागर महाराज की संसघ सानिध्य में श्रद्धालुओं ने पूजन शिविर के माध्यम से भक्ति भाव से जिनेंद्र भगवान की पूजा अर्चना की। पूजा का शुभारंभ जिनेंद्र भगवान की प्रतिमा के अभिषेक से हुआ। शांति धारा का सौभाग्य विपिन जैन को प्राप्त हुआ। रीता दीदी और नीरज भैया के निर्देशन में देव शास्त्र गुरू भगवान पार्श्वनाथ पूजन, नंदीश्वर दीप पूजन, सोलहकरण पूजन तथा दशलक्षण पर्व की पूजा की । इस मौके पर आचार्य सुंदर सागर महाराज ने कहा कि सभी व्यक्तियों के अंतकरण में यह भाव रहता है कि लोग मेरा सम्मान करें। मेरे हर कार्य की प्रशंसा करें। मेरे पास जो ज्ञान और वैभव है, वह सर्वश्रेष्ठ है। ऐसा दुनिया के सभी व्यक्ति जिस धरातल पर खड़े होते हैं। उससे अपने आप को बहुत ऊपर समझने लगते हैं। इसी अहंकार के कारण आदमी पद और प्रतिष्ठा की अंधी दौड़ में शामिल हो जाता है। जो उसे गहरे गर्भ में धकेलती है। शाम को विहर्ष सभागार में गुरू भक्ति प्रश्न मंच हुआ। इसके बाद टीसी ग्रुप ने नृत्य नाटिका की प्रस्तुति की । बच्चों को पवन जैन ने पुरस्कृत किया। संचालन वरदान जैन ने किया।