बागपत। जंगल सिमट चुके हैं, जिस कारण जंगली जानवर खुद को अनुकूल बनाने के लिए नया ठिकाने बना रहे हैं। पिछले दस साल से तेंदुए इंसानी बस्ती के नजदीक बढ़ते जा रहे हैं, यही नहीं नया ठिकाना गन्ने के खेत बन गए हैं। दिल चस्प बात यह है कि तेंदुए ने एक बार भी किसी भी व्यक्ति पर हमला नहीं किया है, जबकि अब तक तीन तेंदुए मारे जा चुके हैं।
करीब पांच साल पहले हिसावदा गांव में शिकारियों ने तेंदुए को मारकर बाइक पर गांव में घुमाया । साल 2016 में निरपुड़ा में तेंदुए का बच्चा शिकारियों के हत्थे चढ़ गया। ग्रामीण दौड़े तो शिकारी भाग निकले, लेकिन तेंदुआ मर चुका था। पिछले वर्ष 23 अक्तूबर को ककौर कलां गांव में शिकारियों के खटके में तेंदुआ फंस गया था। वन विभाग की लापरवाही की वजह से तेंदुए की मौत हो गई। इन सब मामलों से स्पष्ट होता है कि तेंदुए का नया ठिकाना ईंख के ऐसे खेत हैं, जो नदी क्षेत्र के आसपास हैं। जहां सूकर, गीदड़, कुत्तों और नील गाय का आसानी से शिकार किया जा सकता है। जहां भी तेंदुए दिखे हैं, वह गांव के एक किमी के दायरे में ही दिखे हैं, जिससे जाहिर है कि तेंदुए इंसानी बस्ती के आसपास घूम रहे हैं। लेकिन एक भी मामला ऐसा नहीं है, जब तेंदुए ने किसी इंसान पर हमला किया हो, जबकि अब तक शिकारी तीन तेंदुए मार चुके हैं। वन्य जीव विशेषज्ञ जीएस कुसारिया का कहना है कि तेंदुए इंसानों पर हमला नहीं करता। ऐसे बेहद ही कम मामले सामने आए हैं।
यकीन नहीं करता वन विभाग
बागपत। विभिन्न गांव के ग्रामीण आए दिन तेंदुए के देखे जाने की शिकायत करते हैं, लेकिन वन विभाग कभी हामी नहंी भरता। जांच होती है तो पंजे कभी कुत्ते के बताए जाते हैं तो कभी जंगली बिल्ली के, लेकिन हकीकत यह है कि जिले के नदी क्षेत्र के गांवों में तेंदुए हैं।
सैकड़ों किमी निकलता है रात में
बागपत। तेंदुए एक ही रात में एक सौ किमी से अधिक निकल जाता है। यही वजह है कि जिस जगह यह एक बार दिखता है, वहां दोबारा मुश्किल ही रहता है। शिकार और पानी जिस क्षेत्र में आसानी से मिल जाए, वहां ठहरता है।
ककौर प्रकरण की जांच हरियाणा पुलिस को
बागपत। ककौर कलां में तेंदुए की मौत के मामले की जांच अब हरियाणा पुलिस कर रही है। वन विभाग की विभागीय जांच चल रही है, लेकिन हरियाणा पुलिस हरियाणा के सोनीपत की पुलिस शिकारियों की तलाश में जुटी है।