बागपत। यमुना ही नहीं, हिंडन और कृष्णा नदी भी लोग जान हथेली पर रखकर पार करने को मजबूर हैं। काठा नाव हादसे के बाद भी कोई इंतजाम नहीं दिखे। गांव से लेकर मामला विधानसभा तक पहुंच चुका है, लेकिन समस्या कब सुलझेगी कोई नहीं जानता।
बात चौगामा क्षेत्र की करें तो यहां एक तरफ हिंडन और दूसरी तरफ कृष्णा नदी बहती है। दोनों नदियों के पार किसानों की हजारों बीघा कृषि भूमि है। हिंडन किनारे बसे तवेला गढ़ी, झूंडपुर, मिलाना, खपराना और कृष्णा नदी के किनारे बसे बूढ़पुर, कंडेरा, बामनौली, रहतना के किसानों को नदी पार करने के लिए समस्याओं का सामना करना पड़ता है। किसान नदियों को तैरकर या बल्ली के सहारे किसी तरह यहां पर नदी पार करते हैं। कई बार नदी पार करते समय बड़े हादसे भी हो चुके हैं। रहतना से बिनौली जाने के लिए दादरी से सीधा रास्ता है, लेकिन कृष्णा नदी पर पुल न होने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। रहतना के ग्रामीण महक सिंह, अमित कुमार, रमेश कश्यप, रामशरण कश्यप, पूर्व प्रधान संजीव, पप्पू मुखिया और पूर्व प्रधान रणवीर का कहना है कि गांव के लोगों और बच्चों को कृष्णा नदी पार करने के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। काठा और अन्य गांव में यमुना पार करने के लिए भी लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। बागपत में भी लोग परेशान हैं, लेकिन समस्या का समाधान होता नहीं दिख रहा।