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सिनौली की सीने से फिर निकलेंगे राज, जल्द शुरू होगी खुदाई

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बागपत। सिनौली गांव में दोबारा से उत्खनन कार्य शुरू किया जाएगा। बरसात के मौसम के चलते रोक दिया गया उत्खनन कार्य शुरू होने के कारण ग्रामीणों के बीच उत्साह है। पिछले 13 साल में तीसरी बार गांव में उत्खनन किया जा रहा है। लोगों को उम्मीद है कि यहां पर फिर से कोई न कोई इतिहास का पन्ना जरूर निकलेगा।
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सबसे पहले वर्ष 2005 के सितंबर माह में सिनौली में खुदाई का कार्य कराया। यहां हड़प्पा कालीन शव दान गृह मिला। इससे इस क्षेत्र में हड़प्पा कालीन सभ्यता की पुष्टि हो गई । इसके बाद वर्ष 2015 में चंदायन गांव में उत्खनन का कार्य केंद्र सरकार करा चुकी है। चित्रित धूसर मृदभांड संस्कृति, कुषाण काल, गुप्त और राजपूत सभ्यता के प्रमाण भी मिल चुके हैं। पिछले वर्ष पहले बरनावा में खुदाई कार्य कराया, लेकिन कुछ खास हाथ नहीं लगा । इसके बाद सिनौली में खुदाई कराई तो प्राचीन रथ और ताबूत मिले थे। ग्राम प्रधान योगेंद्र कुमार का कहना है कि दोबारा से खुदाई शुरू होने से जरूर यहां कोई न कोई राज जरूर खुलेगा।

बरनावा में रहे थे खाली हाथ
बागपत। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अधीन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग उत्खनन शाखा द्वितीय और भारतीय पुरातत्व संस्थान लाल किला की संयुक्त टीम बरनावा के लाक्षागृह टीले की विधिवत उत्खनन किया, लेकिन यहां कुछ हासिल नहीं हुआ। बरनावा का टीला असल में सदियों से लोगों के लिए उत्सुकता है। पुरातत्व विभाग ने इसे संरक्षित किया है। सदियों बाद भी सिर्फ सरकारी उदासीनता की वजह से रहस्य बना हुआ है। मुजफ्फरनगर, शामली में भी महाभारत काल के अवशेष हैं। लेकिन खुदाई में यहां कुछ खास नहीं मिला था। केंद्रीय सांस्कृतिक मंत्रालय ने बरनावा में दिसंबर 2017 से मई 2018 तक उत्खनन कार्य को मंजूरी दी थी।
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