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इमरान हत्याकांड में दो आरोपियों पर दोष सिद्ध

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बागपत। एडीजे स्पेशल एससी/एसटी कोर्ट में चल रहे मोहल्ला व्यापारियान बागपत के इमरान की हत्या के मामले में 11 साल बाद दो आरोपियों पर दोष सिद्ध हुआ है। जबकि एक आरोपी ही पहले ही मौत हो चुकी है। दोनों आरोपी जमानत पर बाहर आए हैं। दोष सिद्ध होने की भनक लगते ही दोनों कचहरी परिसर से भाग गए। कोर्ट से दोनों के वारंट जारी कर दिए हैं।
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एडीजीसी चश्मवीर सिंह ने बताया कि 23 जुलाई 2007 की रात में करीब नौ बजे मोहल्ला व्यापारियान बागपत निवासी शहजाद (22) पुत्र फकरू को मोहल्ले के बाजा, गुफ्फा और गुलजार पुत्र अब्दुल सलाम घर से यह कहकर ले गए थे कि बाजा की भैंस चोरी हो गई है, लेकिन वह घर नहीं लौटा। तीनों आरोपी वापस घर पर लौट आए। परिजनों ने शहजाद के बारे में उनसे पूछा तो उन्होंने बताया कि उसके ठिकाने लगा दिया है। 24 जुलाई को युवक का शव दिल्ली-सहारनपुर हाइवे स्थित लक्ष्य पब्लिक स्कूल के पास पड़ी मिली । मृतक की बहन इमराना ने भाई की जहर खिलाकर हत्या करने का आरोप लगाकर कोतवाली में बाजा, गुफ्फा और गुलजार के खिलाफ तहरीर दी, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज तक नहीं की। इसके बाद बहन ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। 13 मार्च 2008 को न्यायालय के आदेश पर बागपत कोतवाली में तीनों आरोपियों के खिलाफ धारा 304 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। तीनों आरोपी जमानत पर बाहर आ गए। उनका मुकदमा एडीजे स्पेशल एससी/एसटी रमेश चंद दिवाकर की कोर्ट में चल रहा है। एक आरोपी बाजा की पहले ही मौत हो चुकी है। अभियोजन पक्ष की तरफ से तीन गवाह पेश किए। बृहस्पतिवार को मामले में सुनवाई गई। दो आरोपी गुफ्फा और गुलजार पर दोष सिद्ध हो गया। उन्होंने बताया कि दोष सिद्ध होते ही दोनों आरोपी कचहरी परिसर से भाग निकले। कोर्ट से दोनों के वारंट जारी कर दिए हैं। मामले में अगली सुनवाई 16 जुलाई हो होगी।
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