जैन अनुयायियों ने मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की, नृत्य किया
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बड़ौत (बागपत)।
जैन अनुयायियों के चल रहे दशलक्षण पर्व के दसवें दिन जैन अनुयायियों ने उत्तम आंकिचन धर्म को अंगीकार कर मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की और मंदिरों में चल रहे विधानों और धार्मिक कार्यक्रमों में सैकड़ों भक्तों ने भाग लिया।
बड़ा जैन मंदिर में प्रभावना भूषण और अनुमान सागर महाराज के सानिध्य में दिगंबर जैन युवा मंच के तत्वाधान में चल रहे तेरह दीप महा मंडल विधान में चंद्र प्रभु का अभिषेक किया । इसके बाद नित्य नियम, दशलक्षण धर्म और सोलहकरण की पूजा की । पंडित अमर चंद जैन शास्त्री के निर्देशन में तेरहदीप महामंडल विधान में चार पूजा की । इंद्र-इंद्राणियों ने संगीत की मधुर धुनों के बीच नृत्य कर अपनी भावना प्रकट की। दिगंबर जैन छोटा मंदिर जैन अतिथि भवन में भी श्रद्धालुओं ने विशेष पूजा अर्चना की। सायं काल बड़ा जैन मंदिर, छोटा मंदिर और अतिथि भवन में श्रद्धालुओं ने आरती उतारी और रात्रि में जैन युवा मंच के सदस्यों ने भजनों की प्रस्तुति की। इसमें प्रवीण जैन, अतुल जैन, सतीश जैन, प्रदीप जैन, सुशील जैन, श्रवण जैन, अतुल कुमार, दिनेश जैन, सुरेंद्र जैन, अंकुर जैन, सुनील जैन, पंकज जैन, अमित जैन, अनुज जैन, मुकेश, विपिन जैन, नीरज जैन आदि रहे।
प्रथम सत्य ही अंतिम सत्य - अनुमान सागर
बड़ौत। अतिथि भवन में आयोजित धर्मसभा में अनुमान सागर महाराज ने कहा प्रथम सत्य ही अंतिम सत्य है। मनुष्य प्रथम सत्य को भूल जाता है। इसलिए परमात्मा की प्राप्ति नहीं कर पाता। प्रथम सत्य यह है कि मनुष्य संसार में नग्न आया है और अंतिम सत्य है यहां से मनुष्य नग्न ही जाएगा। जब तक मनुष्य अहंकार, मन का राग द्वेष, तेरे-मेरे के भाव से मुक्त नहीं होगा, तब तक संसार से मुक्ति नहीं पायेगा। परिग्रही व्यक्ति कभी भी संसार से पार नहीं हो सकता। संचालन अंकुर जैन ने किया। इस मौके पर भजन सिम्मी जैन ने प्रस्तुत किए।
अजितनाथ भगवान का गर्म प्रासुक जल से अभिषेक किया
बड़ौत। अजितनाथ मंदिर कमेटी के तत्वावधान में दशलक्षण पर्व के दसवें दिन आचार्य सुंदर सागर महाराज के सानिध्य में विहर्ष सभागार, सत्यवती जैन धर्मशाला में सामूहिक नित्य नियम पूजन का आयोजन किया और विशेष पूजा-अर्चना की । अजितनाथ भगवान की प्रतिमा का प्रासुक गर्म जल से नमन किया । शांतिधारा का सौभाग्य पारस जैन को प्राप्त हुआ। धर्मचारिणी रीता दीदी और नीरज के निर्देशन में भक्ति भाव से जिनेंद्र भगवान का पूजन किया। नित्य नियम की पूजा में देवशास्त्र, गुरूपूजन, नवदेवता पूजन व दशलक्षण धर्म की पूजा की। इसमें प्रमोद जैन, वरदान जैन, अशोक जैन, इंद्राणी, मधु जैन आदि रहे। वहीं आचार्य सुंदर सागर महाराज ने भी विचार रखे।
बांटने से बढ़ता है प्रेम - अरुण मुनि
बड़ौत। जैन स्थानक शहर में आयोजित धर्मसभा में जैन संत अरुण मुनि ने कहा प्रेम हमेशा बांटने से बढ़ता है। भगवान ने मनुष्यों को ही स्वास्थ्य दिमाग दिया है। इससे वह समझ सकता है। भगवान ने मनुष्य को प्रेम का उपहार भी दिया है और कहा इसका संचय मत करना इसे दूसरों में बांटना है। केवल अपने परिवार तक ही सीमित नहीं रखना। जिस चीज को जितना बांटा जाता है। वह उतनी बढ़ती है अगर प्रेम बांटोंगे तो प्रेम बढ़ेगा। उन्होंने कहा जिस जगह धर्मभावना होगी, वहीं परमात्मा का वास होगा। इससे पूर्व अमन मुनि ने भी विचार रखे। इसमें जयप्रकाश जैन, अजय, दीपक, मोहित, शशंाक, कालू, गौरव, भारतभूषण, अभय, हंस कुमार, शैलबाला, इंद्राणी, कमलेश, गीता, नीलू, प्रवीण आदि रहे। मीडिया प्रभारी हंस कुमार जैन ने बताया मंगलवार को 10 बजे जैन स्थानक शहर से जैन संत जैन स्थानक मंडी में प्रवेश करेंगे।