बागपत। देहरादून से गिरफ्तार कुख्यात धर्मेंद्र किरठल के खिलाफ 49 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें हत्या के 15 से ज्यादा मुकदमे हैं। इनके अतिरिक्त लूट व रंगदारी के मामले हैं। ज्यादातर में उसे जमानत मिल चुकी है। वहीं, कुछ मुकदमे खत्म हो चुके हैं।
धर्मेंद्र किरठल के खिलाफ 28 साल पहले लूट का पहला मुकदमा रमाला थाने में दर्ज हुआ था। इसके बाद से वह लगातार आपराधिक वारदातों को अंजाम देता रहा है। वह उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त उत्तराखंड, दिल्ली और हरियाणा में गिरोह बनाकर संगठित अपराध करता था। बीते वर्ष 15 अक्टूबर को शासन के निर्देश पर पुलिस ने उसकी 60 लाख कीमत की संपत्ति कुर्क की थी। पिछले दिनों पंचायत चुनाव के दौरान धर्मेंद्र किरठल की उसके गांव किरठल के आसपास गतिविधियों की सूचना पुलिस को मिली थी। पुलिस ने तब ड्रोन कैमरों की मदद से जंगल खंगाला था। हालांकि उसका सुराग नहीं लगा था।
विरोधी का साथ देने पर की थी इरशाद की हत्या
बीती 12 दिसंबर को ग्राम किरठल की पट्टी मूले जाट निवासी इरशाद अली (58) की खेत में गन्ना छीलते समय गोली मारकर हत्या कर दी थी। इरशाद के बेटे सद्दाम हुसैन ने कुख्यात धर्मेंद्र किरठल, सुन्हेड़ा गांव निवासी सतेंद्र मुखिया, मुजफ्फरनगर के सिसौली निवासी सुभाष उर्फ छोटू और एक अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में धर्मेंद्र किरठल फरार चल रहा था। इसके चलते आईजी प्रवीण कुमार ने उसके ऊपर 50 हजार का इनाम घोषित कराया था। बताया कि यह हत्या चुनावी रंजिश को लेकर की गई थी। किरठल गांव में मूले जाटों की करीब 800 वोट हैं। वे इरशाद के इशारे पर एकमुश्त किसी भी प्रत्याशी को मिलती थी। इस बार इरशाद धर्मेंद्र किरठल के विरोधी कृष्णपाल का साथ दे रहा था। जिसके चलते इरशाद की हत्या कर दी गई। पिछले पंचायत चुनाव में धर्मेंद्र किरठल की मां सुरेश देवी जिला पंचायत सदस्य और पत्नी सुदेश देवी ग्राम प्रधान बनी थीं। इस बार भी उसके परिजन चुनाव लड़ने की फिराक में थे, लेकिन पुलिस के दबाव के चलते वे ऐसा नहीं कर पाए। इस बार कृष्णपाल की पत्नी मंजू ग्राम प्रधान बनी हैं।