- बच्चों के अलावा स्कूलों के खाते में भी पहुंचा बजट, दो साल से अभिभावक कर रहे थे इंतजार
- खाते में रुपये आने के बाद अब अभिभावक ड्रेस व अन्य सामान खरीद सकेंगे, नहीं होगी परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। दो साल से आरटीई के बजट का इंतजार कर रहे अभिभावकों के खाते में 43 लाख 75 हजार रुपये का बजट भेज दिया गया। इससे अभिभावक बच्चाें के लिए ड्रेस व किताबें खरीद सकेंगे और उन्हें किसी भी तरह की परेशानी नहीं होगी।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत कान्वेंट स्कूलों में 25 फीसदी सीटों पर आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को प्रवेश दिया जाता है। यहां पढ़ने वाले बच्चों की शुल्क की प्रतिपूर्ति सरकार की तरफ से दी जाती है। कॉपी-किताब का भी पैसा अभिभावकों के खाते में भेजा जाता है। इससे गरीब बच्चों को पठन-पाठन में कोई दिक्कत न हो सके। वर्ष 2024-25 में जिले में कान्वेंट स्कूलों में 875 बच्चों का नर्सरी, कक्षा एक में दाखिला कराया गया था और उनके खाते में धनराशि नहीं पहुंची थी।
प्रदेश सरकार एक बच्चे के लिए पांच हजार रुपये दिए जाते है और स्कूल के खाते में 425 रुपये के हिसाब से बजट भेजा जाता है। शासन से बच्चाें के अभिभावक के खाते में 43 लाख 75 हजार रुपये व स्कूलों के खाते में तीन लाख 71 हजार 875 रुपये भेज दिए है।
- धनराशि का महत्व
विद्यालयों को फीस प्रतिपूर्ति और बच्चों को स्टेशनरी और कॉपी किताब खरीदने के लिए धनराशि गरीब और वंचित परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है। इससे उन्हें अपने बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाने में मदद मिलेगी। यह धनराशि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त और सपनों को पूरा करने में मदद करेगी।
- वर्जन : जिले में वर्ष 2024-25 में 875 बच्चों का दाखिला कराया गया था। शासन से अभिभावकों व स्कूलों के खाते में बजट भेज दिया गया है, ताकि उन्हें पढ़ाई में किसी भी तरह की दिक्कत न हो। - गीता चौधरी, बीएसए