बड़ौत। केंद्र सरकार ने स्वच्छ सर्वेक्षण के आंकड़े जारी कर दिए हैं। स्वच्छता के मापदंड पर बड़ौत फिसड्डी साबित हुआ। शहर को 421वीं रैंक मिली, यही नहीं दो हजारों अंकों के मापदंड पर सिर्फ 489 अंक ही हासिल हुए हैं। आंकड़े पालिका की सफाई व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं। नकारे सिस्टम का खामियाजा बड़ौत को भुगतना पड़ रहा है। लोग सफाई व्यवस्था खराब होने का ठीकरा पालिका प्रशासन पर फोड़ते हैं।
शहर के पठानकोट वार्ड नंबर एक और दो में सफाई व्यवस्था बेहद खराब है। कांशीराम कॉलोनी अब नगर क्षेत्र को दी गई है, यहां भी सफाई व्यवस्था ठीक नहीं है। फाइलों में रोजाना कूड़ा उठान होता है, लेकिन हकीकत रैंक से खुलकर अब लोगों के सामने आ गई है। जिला और पालिका प्रशासन भले ही लाख दावे करें, लेकिन रिपोर्ट बताती है कि लोगों को जागरूक करने के लिए एक भी अभियान यहां पर नहीं कराया।
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार शहर की जनसंख्या 1,03,764 लाख है। पालिका का एरिया 25 वार्डों में विभाजित है। जनपद बागपत की राजनीति का केंद्र भी बड़ौत है। शिक्षण संस्थाओं के अलावा यहां नर्सिंग होम भी काफी तादाद में है। देहात का बड़ा एरिया रोजाना शहर में आता है और शाम को वापस अपने-अपने गांव पहुंच जाता है।
पांच लाख खर्च, क्यों नहीं होती सफाई
पालिका के सफाई इंस्पेक्टर ब्रहम पाल सिंह बताते हैं कि शहर के लिए सिर्फ 90 सफाईकर्मी हैं, जबकि यहां आवश्यकता 300 सफाईकर्मियों की है। प्रत्येक महीने सफाई व्यवस्था पर करीब पांच लाख रुपये खर्च होते हैं, लेकिन सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं हो पा रही है। निगरानी दो सफाई इंस्पेक्टर करते हैं। यदि सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जाए तो सफाई व्यवस्था दुरुस्त हो सकती है।
जानिए, कैसे किया अंकों का बंटवारा
सर्वेक्षण रिपोर्ट में दो हजार अंकों का बंटवारा किया है। पालिका ने जो डाटा उपलब्ध कराया, उसके 900 अंक निर्धारित थे।
टीम ने इन आंकड़ों की सच्चाई जानकर खुद अंक दिए। टीम ने फील्ड में जाकर खुद जांच की, इसके लिए पांच सौ अंक निर्धारित थे। नागरिकों ने जो फीड बैक दी, उसके लिए छह सौ अंक निर्धारित थे। इस तरह इन दो हजार अंकों में से शहर को अंक दिए गए। कूड़ा उठान, सफाई, यातायात, ओडीएफ, भवन और शिक्षा का मापदंड भी इसमें देखा गया।
1580 लोगों ने दी थी फीड बैक
सर्वेक्षण में बड़ौत के 1580 लोगों ने अपनी फीड बैक दी। देश में पहले स्थान पर रहे इंदौर के सापेक्ष बड़ौत को देखें तो बेहद पिछड़े हुए हैं। इंदौर को जहां दो हजार में से 1808 अंक मिले, वहीं बड़ौत को सिर्फ 489 अंक ही हासिल हुए। जागरूकता अभियान चलाने में बड़ौत को शून्य अंक मिले हैं।
रोजाना कहां फेंके 50 मीट्रिक टन कूड़ा
बड़ौत शहर से रोजाना 50 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है। पालिका के आंकड़ों के अनुसार सिर्फ दो वार्ड ऐसे हैं, जिनमें से शत प्रतिशत घरों में जाकर सफाई कर्मचारी डोर टू डोर कूड़ा उठाते हैं। शहर से कूड़ा उठा लिया जाता है, लेकिन इसके निस्तारण के लिए कोई जगह नहीं है। पालिका पिछले 10 साल से 50 बीघा जमीन की मांग कर रही है। भाजपा विधायक एवं पालिकाध्यक्ष केपी मलिक कई बार प्रशासन से जगह देने की मांग कर चुके हैं, लेकिन अब तक समाधान नहीं हुआ।
क्या कहते हैं बड़ौत के लोग
व्यापारी नेता रवि पालीवाल का कहना है कि गंदगी से लोग बेहाल है।
डॉ. आर के गर्ग का कहना है कि सफाई व्यवस्था के लिए नागरिक भी जिम्मेदार है।
कल्लू मलिक ने कहा सड़कों पर गंदगी पड़ी रहने से वहां के लोगों को बड़ी परेशानी उठानी पड़ रही है।
सागिर मलिक ने कहा मच्छरों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है और जिस कारण लोग और बच्चों में संक्रामक रोग फैल गया है।
इकबाल मलिक ने कहा नगर में कूड़ा उठाने की उचित व्यवस्था नही है। जिस कारण सड़कों पर ही गंदगी फैली रहती है।
सपा नेता विजय राणा का कहना है कि स्वच्छता अभियान के प्रति पालिका की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
सफाई कर्मियों की कमी, स्थान भी नहीं मिला
भाजपा विधायक एवं पालिकाध्यक्ष केपी मलिक कहते हैं कि सफाई कर्मियों की कमी है। इसके बावजूद कूड़े का उठान कराया जाता है, लेकिन निस्तारण के लिए पालिका के पास जगह नहीं है। गलियों से कूड़ा उठाकर शहर के बाहर फेंका जाता है, रोजाना 50 मीट्रिक टन कूड़े निकलता है। यही कारण है कि यहां गंदगी नजर आती है। इसके बावजूद सफाई अभियान चलाया जाएगा, लोगों को जागरूकता किया जाएगा, ताकि बड़ौत सुंदर शहर बन सकें।