बड़ौत (बागपत)। दयानंद बाल विद्या मंदिर में चल रहे दो दिवसीय आर्य समाज के वार्षिकोत्सव का समापन हुआ। इसमें सूक्ष्म यौगिक क्रियाएं एवं यज्ञ आदि की क्रियाएं कराई ।
सोमवार को यज्ञ से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। यज्ञमान उमानंद त्यागी रहे और ब्रह्म समर भानु रहे। यज्ञ में आर्य जनों ने वेद मंत्रों के साथ संसार की समृद्धि की कामना कर आहुतियां दीं। वेद आचार्य हरी शंकर अग्निहोत्री ने बताया कि मनुष्य मन से ही मजबूत और मन से ही कमजोर बनता है। मनुष्य के संपूर्ण व्यवहार का आधार ज्ञान होता है और सृष्टि के आरंभ में परमात्मा से वेदों के रूप में प्राप्त हुआ। इसलिए दयानंद ने प्रथम नियम में लिखा है कि सत्य विद्या और पदार्थ विद्या से जाने जाते है। उन सब आदि का मूल परमेश्वर है। सृष्टि में जीवन जीने के सारें सूत्र वेदों के रूप में प्रदान करते है।
भजन उपदेशक प्रियंका भजनों के माध्यम से बताया कि दुख पांच प्रकार के होते हैं। मनुष्य को इन दुखों से बचना है तो ईश्वर के बंधन में बंध जाना चाहिए। भजन उपदेशक श्रीपाल वर्मा, चरण सिंह, ओमपाल आदि ने भजनों की प्रस्तुतियां दीं। अध्यक्षता संयुक्त रूप से अग्रिस मुनि और मित्रमुनि ने की। संचालन प्रीतम सिंह वर्मा ने किया। इस कार्यक्रम के संयोजक डॉ. ओमवीर सिंह आर्य रहे। कार्यक्रम में डॉ. हरपाल सिंह, जसवीर मलिक, सतपाल पथौलिया, विनोद भारद्वाज, सहंसर पाल, प्रियंका, रीतू शर्मा, सीमा शर्मा, अश्वनी, रश्मि तोमर आदि रहे।