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छठे दिन जैन अनुयायियों ने उतम संयम धर्म अंगीकार किया

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छठे दिन जैन अनुयायियों ने उत्तम संयम धर्म अंगीकार किया
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बड़ौत (बागपत)।
जैन अनुयायियों के चल रहे दशलक्षण पर्व पर छठे दिन जैन अनुयायियों ने उत्तम संयम धर्म को अंगीकार कर मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की और मंदिरों में चल रहे विधानों और धार्मिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति की।
दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में जैन युवा मंच के तत्वावधान में मुनि अनुमान सागर महाराज के सानिध्य में तेरहदीप महामंडल विधान में पीत वस्त्र धारण करके विशेष पूजा-अर्चना की। पंडित अमर चंद जैन शास्त्री के निर्देशन में चंद्रप्रभु भगवान का अभिषेक किया। इसके बाद नित्य नियम और दशलक्षण धर्म की पूजा की । विधान में दक्षिण दिशा भारत क्षेत्र, रुपांचल पर जिन मंदिर पूजा, उत्तर दिशा अहरावत क्षेत्र, दक्षिण उत्तर दिशा षट कुलाचल पर धातु के दीप, मध्य विजय अचल मेरू के दक्षिण दिशा, धातुदीप मध्य विजयांचल मेरू के भरत क्षेत्र, उत्तर ईशान कोण जम्बू वृक्ष पर मंदिर मेरू पश्चिम विजय क्षेत्र आदि की दस पूजा की । बीच-बीच में पंडित अमरचंद जैन शास्त्री ने विधान की महत्ता पर प्रकाश डाला। छोटा जैन मंदिर, अतिथि भवन में भी पूजा की। शाम को बड़ा जैन दिगंबर जैन मंदिर में भगवान की आरती उतारी । छोटे जैन मंदिर और जैन अतिथि भवन में भगवान की आरती श्रद्धालुओं ने उतारी। दिगंबर जैन अतिथि भवन में जैन धर्म पर एक नाटिका भरत बाहुबली एवं वैराग्य नामक नाटिका का मंचन किया । इसमें प्रवीण जैन, अतुल जैन, सुभाष जैन, अतुल, सुंदर जैन, शीलचंद, पंकज जैन, आनंद, अंकुश, अनुज जैन, विपिन जैन आदि रहे।
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जीवन को दिशा बोध प्रदान करता है संयम - अनुमान सागर
बड़ौत। जैन अतिथि भवन में मुनि अनुमान सागर महाराज ने कहा संयम जीवन को दिशा बोध प्रदान करता है। संयम के अभाव में इंद्रियां कई प्रकार की अलग-अलग मांग करती है। जहां स्पष्ट इंद्रीय गद्दे मानती है तो रसना इंद्रिय स्वाद चाहती है और चक्षु इंद्रियां रूप चाहती है। जब इंद्रियों की अलग-अलग मांगो की पूर्ति इंसान करने लगता है तब वह इंद्रियों का गुलाम हो जाता है। जीव को अपनी शक्ति पहचानकर इंद्रियों का गुलाम नहीं बल्कि इंद्रियों को अपना गुलाम बनाने का प्रयास करना चाहिए।

अजितनाथ भगवान की प्रतिमा का अभिषेक किया
बड़ौत। अजितनाथ दिगंबर जैन प्राचीन मंदिर कमेटी के तत्वावधान में दशलक्षण पर्व पर विहर्ष सभागार और सत्यवती जैन धर्मशाला में आचार्य सुंदर सागर महाराज के सानिध्य में सत्य संयम धर्म की पूजा की । पूजा का शुभारंभ अजितनाथ भगवान की प्रतिमा के अभिषेक से हुआ। गर्म प्रासुक जल से पीत वस्त्रधारी इंद्रों ने घूमते हुए भगवान की प्रतिमा का अभिषेक किया। नित्य नियम की पूजा में नवदेवता पूजन, भगवान पार्श्वनाथ पूजन, सोलहकरण पूजन और दशलक्षण धर्म की पूजा की। श्रद्धालुओं ने उत्तम संयम धर्म अंगीकार किया। इस मौके पर आचार्य सुंदर सागर महाराज ने कहा जो मोक्ष जाना चाहते हैं। उनके लिए संयम शब्द का विशेष महत्व है। संयम का अर्थ है जो अपनी आत्मा पर नियंत्रण कर ले, वहीं संयम है। पांच इंद्री रूपी घोड़े की लगाम ही संयम है। संयम अनुशासन में रहना सिखाता है। इसमें प्रमोद जैन, वरदान जैन, जयप्रकाश जैन, संजय जैन, मधु जैन, इंद्रीण जैन आदि रहे। रात्रि में डिवाइन ग्लोबल स्कूल के बच्चों ने कार्यक्रम प्रस्तुति किए। सुदर्शन लाल जैन और संजीव जैन ने बच्चों को पुरस्कार दिए।
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वर्तमान बदलने से बदलता है भविष्य -अरुण मुनि
बड़ौत। जैन स्थानक शहर में आयोजित धर्मसभा में जैन संत अरुण मुनि न ेकहा व्यक्ति का वर्तमान बदलने से भविष्य भी बदल जाता है। वस्तु का साथ रहना पाप नहीं पर उसके प्रति राग बना लेना ही पाप है। उन्होंने कहा आत्मा की स्क्रीन पर टीवी का चैनल चलाओ क्योंकि जब-जब राग बढ़ा है, तब तब मन मट मैला हुआ है और फिर चेतना मट मैली हो जाती है। संसार में जीव के जाने पर जो आकर्षण होता है। उसमें लिप्त होना ही चरित्र मोहनीय कर्म का उदय होता है। उन्होंने कहा राग के कारण जो एक ओर कारण है वह विकार है। इससे पूर्व अमन मुनि ने भी विचार रखे। धर्मसभा में विनोद जैन, भारत, कालू जैन, भूषण, अभय कुमार, पप्पू, दिनेश, हंस कुमार जैन, दीपक जैन, गौरव, शैलबाला, नीतू जैन, राखी जैन, सुषमा, दीपा, पूनम, रीता आदि रहे।
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