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सिरसा का बिगड़ा खेल, बरनावा का क्या होगा?

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बागपत। डेरा सच्चा सौदा के सिरसा डेरे पर हरियाणा सरकार ने शिकंजा कस दिया है। यूपी के इकलौते डेरे बरनावा पर वन विभाग की जमीन कब्जाने के मामले में जांच की आंच है। शुरूआती जांच में वन विभाग कब्जे की बात स्वीकार कर रहा है, लेकिन देखने वाली बात यह होगी कि नतीजा क्या निकलता है। डेरे के सेफ्टी टैंक से लेकर यहां से निकाले जा रहे पाइस जांच की रडार पर हैं।
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बरनावा आश्रम की स्थापना के पिछले 37 साल में शिकायतें हुई, लेकिन मामला फाइलों तक ही दबकर रह गया। कई दशक से बरनावा की चकबंदी प्रक्रिया लटकी है। डेरे की जमीन की स्थिति भी स्पष्ट नहीं हो सकी है। सिरसा पर शिकंजा कसा गया तो यूपी के सबसे बड़े डेरे बरनावा भी जांच में घिरता नजर आ रहा है। एसडीएम बड़ौत अरविंद कुमार ने दो दिन पहले ही चकबंदी और वन विभाग से जमीन की जांच कराने की बात कही थी। वन विभाग की टीम पहुंच भी गई और यह भी स्वीकार किया कि उनकी जमीन पर कब्जा किया गया है। कब्जा कितना है यह अभी स्पष्ट नहीं हो सका है।


बागपत। वन विभाग के डीसीओ बड़ौत सुधीर कुमार श्रीवास्तव बताते हैं कि इस क्षेत्र में वन विभाग की करीब 226 हेक्टेयर जमीन है। इसे 104 ब्लॉक में बांटा गया है। विभाग गाटा संख्या के हिसाब से जांच में जुटा है।
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देरी से जागा सिस्टम
बिनौली। आश्रम के शौचालयों से निकलने वाली गंदगी को वन विभाग की जमीन पर ब्लॉक बनाकर पाइप के जरिये सीधे कृष्णा नदी में डाला है। इससे नदी का जल प्रदूषित हो रहा है। कृष्णा नदी का यही पानी आगे हिंडन से मिलता है। आश्रम से कई पाइप सीधे नदी में डाले हैं। एक तरफ नदियों को बचाने और पानी स्वच्छ करने का संदेश आश्रम से ही दिया जा रहा है और दूसरी तरफ गंदा पानी नदी में निकाला जा रहा है। डीएफओ का कहना है कि इसकी जांच शुरू कर दी। यही नहीं वन विभाग की जमीन की तरफ एक दरवाजा लगा मिला है, जिसे भी वन विभाग की जमीन पर बताया जा रहा है।


वन विभाग ने बरती बड़ी लापरवाही
बिनौली। डेरा अनुयायी हरियाणा और पंजाब में हिंसक हो रहे हैं। बरनावा में पीएसी तैनात है, लेकिन इसके बावजूद वन विभाग की टीम ने अदूरदर्शिता का परिचय दिया। एसडीएम बड़ौत और बिनौली थाने की पुलिस को बगैर सूचना दिए और बगैर सुरक्षा के टीम जांच के लिए पहुंच गई। जबकि खुफिया इनपुट है कि बरनावा में डेरा अनुयायी हंगामा कर सकते हैं। ऐसे में टीम ने जांच भी की और एकबारगी आश्रम में भी घुसी, इसके विरोध की आशंकाओं से इंकार नहीं किया जा सकता, ऐसे में वन विभाग की अदूरदर्शिता से माहौल खराब हो सकता है।
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