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जीवन में अहम का विसर्जन ही मोक्ष प्राप्ति है- अरूण मुनि

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बड़ौत (बागपत)। जैन संत अरुण मुनि ने कहा जीवन में अहम का विसर्जन ही मोक्ष प्राप्ति होती है। ईंट और पत्थरों का संसार नहीं होता। जीवन में अहम भाव का विसर्जन आवश्यक है।
जैन स्थानक शहर में आयोजित धर्मसभा में उन्होंने कहा जिनवाणी को सुनना ही नहीं उसका प्रयोगात्मक करना आवश्यक होता है। जनसमस्या अहम की है। अंधकार से दूर जाकर प्रकाश को पाना यदि चाहते हो तो आनंद की खोज करनी होगी। शरीर और इंद्रियों का मरण तो होता है, परंतु वास्तविक मरण अहम का होता है। उन्होंने कहा जो साधना महावीर ने की थी, वह साधना आज भी हो सकती है। तपस्या चाहे जितनी भी क्यों न कर लो, मगर जब तक अहम को नहीं मारा जाएगा, तब यह जन्म-मरण चलता रहेगा। जब तक हम अपने आप को ही सब कुछ मानते रहेंगे तनाव बढ़ता रहेगा और जीवन का बिखराव होता रहेगा। अपनी वृत्तियों को बदलना ही पड़ेगा। अमन मुनि ने भी धर्मसभा को संबोधित किया। धर्मसभा में संदीप जैन, रामनिवास, अतुल जैन, अक्षत जैन, शिखर चंद, हंस कुमार, दीपक जैन, शैल बाला, इंद्राणी, कमलेश, गीता, पूनम, अनुराधा, मोनिका आदि रही।
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जीओ और जीने दो
बड़ौत। विहर्ष सभागार में आचार्य सुंदर महाराज ने कहा भगवान महावीर के जीओ और जीने दो के सुख को पूरा विश्व मानता है। इस मौके पर मंगलाचरण विकास जैन ने किया। आर्यिका सुनन्यमति ने भी विचार रखे। धर्मसभा में मदन लाल, प्रमोद, अशोक, वरदान, संदीप, शशि, अतुल आदि रहे।
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